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अफीम नीति : देश के चार राज्यों में पैदा होगी अफीम, उत्तराखण्ड में पहली बार होगी अफीम की प्रायोगिक खेती

केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने इस साल उत्तराखण्ड के दो जिलों में अफीम की प्रायोगिक खेती की घोषणा की है। मंत्रालय ने लम्बे समय बाद देश में अफीम उत्पादक क्षेत्रों की घोषणा की है। अब तक मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में ही अफीम की खेती होती थी।

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कोटा

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Deepak Sharma

Sep 29, 2022

अफीम नीति : देश के चार राज्यों में पैदा होगी अफीम, उत्तराखण्ड में पहली बार होगी अफीम की प्रायोगिक खेती

अफीम नीति : देश के चार राज्यों में पैदा होगी अफीम, उत्तराखण्ड में पहली बार होगी अफीम की प्रायोगिक खेती

जयप्रकाश सिंह
कोटा. केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने इस साल उत्तराखण्ड के दो जिलों में अफीम की प्रायोगिक खेती की घोषणा की है। मंत्रालय ने लम्बे समय बाद देश में अफीम उत्पादक क्षेत्रों की घोषणा की है। अब तक मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में ही अफीम की खेती होती थी। इस बार जारी अधिसूचना के अनुसार राजस्थान के सात जिलों की 45 तहसीलों में अफीम की खेती के लिए लाइसेंस जारी किए जाएंगे। माना जा रहा है कि केन्द्र सरकार अफीम की खेती का रकबा बढ़ा सकती है। हालांकि नारकोटिक्स विभाग ने पिछले 23 साल से अफीम की खेती के लिए नए लाइसेंस जारी नहीं किए।
यहां प्रायोगिक खेती की मंजूरी
वित्त मंत्रालय ने उत्तराखण्ड के उद्यम सिंह नगर स्थित सीएमआईआर-सीमेप परिसर और देहरादून के विकास नगर के साथ ही राजस्थान के उदयपुर स्थित कृषि महाविद्यालय, उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडीसिनल एण्ड एरोमेटिक प्लांट, फैजाबाद के आचार्य नरेन्द्र देव कृषि तथा प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय व मध्यप्रदेश में मंदसौर के केएनके कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर में भी प्रायोगिक खेती होगी।
राजस्थान में इन जिलों में होगी खेती
अधिसूचना के अनुसार, कोटा जिले में रामगंजमंडी, सांगोद, कनवास और लाडपुरा, बारां जिले में बारां, छबड़ा, छीपाबड़ौद और अटरू, झालावाड़ जिले में झालरापाटन, खानपुर, अकलेरा, मनोहरथाना, पिड़ावा, पचपहाड़,गंगधार, असनावर, सुनेल, डग, रायपुर और बकानी तहसील क्षेत्रों में लाइसेंस दिए जाएंगे। भीलवाड़ा जिले में बिजौलियां, मांडलगढ़, कोटड़ी और जहाजपुर, चित्तौड़गढ़ जिले में चित्तौडग़ढ़, भदेसर, डूंगला, बेंगू, रावतभाटा, निम्बाहेड़ा, बड़ी सादड़ी, गंगरार, कपासन, राशमी, भूपाल सागर और बस्सी में खेती होगी। प्रतापगढ़ जिले में छोटी सादड़ी, प्रतापगढ़, अरनोद, धरियावद और पीपलखूंट, उदयपुर जिले में वल्लभनगर, भीण्डर, कानोड़, मावली, लसाडिय़ा क्षेत्र में लाइसेंस दिए जाएंगे।
वित्त मंत्रालय ने उत्तराखण्ड में भी अफीम की प्रायोगिक खेती की घोषणा की है। इसके अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में कृषि कालेज और संस्थानों में खेती की जाएगी। सरकार का यह कदम सराहनीय है। अफीम काश्तकारों के निरस्त लाइसेंस बहालकर इसका उत्पादन बढ़ाना चाहिए।
बद्रीलाल तेली, प्रांत संयोजक अफीम उत्पादन किसान संघर्ष समिति राजस्थान