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प्रदूषण से होगा युद्ध, आकार ले रहा ऑक्सीजोन

ऑक्सीजोन में इस तरह के पेड़ लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि 4 किमी तक तापमान में कमी हो सकेगी। वहीं 8 किमी तक ऑक्सीजोन का असर नजर आएगा। इसमें मोर और पक्षियों के लिए भी संरक्षित स्थान रहेगा।

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ऑक्सीजोन में 15 हजार से ज्यादा पेड़ लगाए जाएंगे।

कोटा. राजस्थान पत्रिका की पहल पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कोटा में बनने जा रहे राज्य के पहले ऑक्सीजोन के विकास ने गति पकड़ ली है। ऑक्सीजोन में 15 हजार से ज्यादा पेड़ लगाए जाएंगे। इस कार्य पर करीब 100 करोड़ रुपए खर्च होंगे। ऑक्सीजोन के लिए पिछले साढ़े तीन साल से प्रयास चल रहे हैं। ऑक्सीजोन में अंतरराष्ट्रीय स्तर के औसत के अनुपात में अधिक संख्या में पेड़ लगाए जाएंगे। ऑक्सीजोन में बड़ी संख्या में पक्षी भी रहेंगे। इसके अलावा तुलसी वन भी बनाया जाएगा। इस इलाके में प्रदूषण के स्तर को देखते हुए तुलसी के पौधे लगाए जाएंगे। तुलसी के पौधे काफी मात्रा में ऑक्सीजन का उत्सर्जन करते हैं। इसका निर्माण करने वाली कंपनी आगामी 10 साल तक इसका रख रखाव करेगी। ऑक्सीजन का निर्माण करीब 35 हैक्टेयर क्षेत्र में होगा। जिसमें गुरुद्वारे, मंदिर, डिस्पेंसरी और बिजली विभाग के दफ्तरों के लिए जगह छोड़ी गई है। राजस्थान पत्रिका की ओर से ऑक्सीजोन बनाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया। शहर के लोगों के साथ टॉक शो आयोजित किए। ऑक्सीजोन में सूख रहे पेड़ों का मुद्दा उठाया। इसके बाद शहर के लोग पेड़ों को बचाने आगे आए। नगर विकास न्यास ने भी पानी का प्रबंध किया और ऑक्सीजोन क्षेत्र में निगरानी के लिए गार्ड लगाए। जब आईएल कारखाना बंद हुआ तब न्यास ने यहां कंक्रीट का जंगल खड़ा करने की योजना बनाई थी। उसी समय पत्रिका ने रायपुर में बनाए गए ऑक्सीजोन का उदाहरण देते हुए यहां ऑक्सीजोन बनाने की योजना की जरूरत से पाठकों को अवगत कराया। इसके बाद यह पहल आगे बढ़ती चली गई। इसके बाद नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल की पहल से यह मूर्त रूप ले रहा है। यहां पेड़ लगाने से पहले यह रिसर्च किया गया है कि किस तरह के पेड़ यहां के वातावरण के अनुकूल हैं और ज्यादा ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाएंगे। ऑक्सीजोन की डीपीआर बनाने से पहले शहर के हर इलाके की वायु गुणवत्ता का परीक्षण कराया गया। इसमें झालावाड़ रोड पर सबसे ज्यादा प्रदूषण पाया गया। ऑक्सीजोन में इस तरह के पेड़ लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि 4 किमी तक तापमान में कमी हो सकेगी। वहीं 8 किमी तक ऑक्सीजोन का असर नजर आएगा। इसमें मोर और पक्षियों के लिए भी संरक्षित स्थान रहेगा। यहां बड़ी संख्या में पेड़ लगाने के साथ पर्यटकों को आकर्षित करने वाली संरचनाएं विकसित की जाएंगी। ऑक्सीजोन में तनाव को कम करने के लिए एक जोन बनाया जाएगा। इसके प्रवेश द्वार पर पुस्तक पढ़ते हुए व्यक्ति की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। जो यह संदेश देगी कि शिक्षा ही मुक्ति का मार्ग है। हैल्थ जोन, आर्ट हिल जैसी कई रचनाएं आकर्षण का केन्द्र रहेगी।
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ये होगी विशेषता
-100 करोड़ खर्च होंगे
-4 किमी तक तापमान में कमी करेगा ऑक्सीजोन
-2 से 3 प्रतिशत कार्बन एमिशन में कमी होगी-66 प्रतिशत क्षेत्र ग्रीन क्षेत्र बढ़ेगा
14 प्रतिशत क्षेत्र में पानी होगा
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ये होंगे आकर्षण
विविध प्रजातियों के पौधों का उद्यान
आर्ट गैलेरी
ऑपन थियेटर
ग्लास हाउस
फ्लॉवर स्ट्रीट
पक्षीशाला