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कोरोना की एक तस्वीर ऐसी भी…..फूल भी नहीं चुन पाए थे परिजन

कोटा. कोरोना के रोगी व इस महामारी से मौत के मामले भले ही थम गए हैं, लेकिन कोरोना के दर्द की तस्वीरें अब भी टीस देने को पर्याप्त है। इसे कोरोना का खौफ कहें या मजबूरी। कोरोना के कारण काल का ग्रास बने कई लोगों की अस्थियों को चुनने के लिए भी कोई नहीं आया।    
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कोटा

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Hemant Sharma

Jul 16, 2021

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कोरोना की एक तस्वीर ऐसी भी.....फूल भी नहीं चुन पाए थे परिजन

कोटा. कोरोना के रोगी व इस महामारी से मौत के मामले भले ही थम गए हैं, लेकिन कोरोना के दर्द की तस्वीरें अब भी टीस देने को पर्याप्त है। इसे कोरोना का खौफ कहें या मजबूरी। कोरोना के कारण काल का ग्रास बने कई लोगों की अस्थियों को चुनने के लिए भी कोई नहीं आया। कुछ राख छूने से कोरोना के भय से कुछ अन्य मजबूरियों के कारण अपनों के फूल चुनने नहीं गए। कुछ ने अंतिम संस्कार करवाने में मदद करने वाली संस्थाओं को ही अस्थियां संग्रहित करने की जिम्मेदारी दे दी। ऐसे मृतकों की संख्या 37 के करीब है।

दो मुक्तिधामों से संग्रहित

15 अप्रेल से 25 मई तक हुए अंतिम संस्कारों में 28 मृतकों की अस्थियों को किशोरपुरा व 9 की अस्थियों को नयापुरा स्थित मुक्तिधाम से संग्रहित किया है। कर्मयोगी सेवा संस्थान् के अध्यक्ष राजाराम जैन कर्मयोगी ने बताया कि मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर इन अस्थियों समेत 174 अस्थि कलशों को 17 जुलाई को विसर्जन के लिए हरिद्वार ले जाया जाएगा।

इतनी भयावह थी स्थितियां

अप्रेल व मई में शहर में काफी लोगों की कोरोना से मौत हुई थी। एक ही दिन में एक एक मुक्तिधाम पर 24 से अधिक शवों को जलाना पड़ा था। कई लोगों ने तो शवयात्रा से लेकर अंतिम संस्कार तक की जिम्मेदारी संस्थाओं को दे दी थी। किशोरपुरा एक प्लेटफार्म पर छह-छह शवों का अंतिम संस्कार किया था। कई लोग तो मुक्तिधामों में खाली पड़ी जगहों पर भी अंतिम संस्कार करने को मजबूर हो गए थे।