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क्या आपको पता है ? 66 प्रतिशत लोगों को लकवा होने के बावजूद नहीं चलता पता

लकवा ह्दयघात व विकलांगता का सबसे बड़ा कारण, देश में हर दिन 1900 की जान ले रहा लकवा  

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Paralysis

लकवा

कोटा. मलेरिया, टीबी से ही नहीं, लकवे की बीमारी भी लोगों की खुशियां छीन रही है। एक अनुमान के तौर पर हर साल मलेरिया से 20 गुना व टीबी से डेढ़ गुना ज्यादा लोगों की जान लकवे से चली जाती है। देशभर में एक लाख लोगों में से 270 लकवे से ग्रसित हो रहे हैं। विश्व में 6 लोगों में से 1 को जीवन में लकवे की शिकायत होती है। लकवा ह्दयघात व विकलांगता का सबसे बड़ा कारण है। प्रत्येक वर्ष 29 अक्टूबर को विश्व लकवा दिवस मनाया जाता है।

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इस साल की थीम अब अगेन्स स्ट्रोक यानी फिर कैसे पैरों पर खड़े होना रखी गई है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को लकवा के प्रति जागरूक करना, अपने कार्य क्षमता को बढ़ाना तथा आगे पुन: लकवा ना हो उसके लिए उपाय करना।

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यह कहता अध्ययन
न्यूरो सर्जन डॉ. विजय सरदाना की माने तो कोटा मेडिकल कॉलेज की न्यूरो विभाग की ओर से किए अध्ययन में सामने आया है कि 66 प्रतिशत लोगों को लकवा होने के बावजूद पता नहीं चलता है। 15 प्रतिशत मरीज 3 घंटे बाद अस्पताल पहुंचते हैं। 46 प्रतिशत को लकवे का कारण बेन में खराबी का पता नहीं चलता। साढ़े 4 घंटे में लकवे के मरीज को अस्पताल पहुंचाना चाहिए, लेकिन और साढ़े दस घंटे में पहुंचता है।

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सर्दी सबसे बड़ा खतरा
सर्दी में थोड़ी सी असावधानी शरीर को लाचार भी कर सकती है। घटते तापमान में लकवे की संभावना बढ़ जाती है। खासतौर पर बुजुर्गों में यह खतरा ज्यादा होता है।

क्या है ये बीमारी?
मस्तिष्क के कुछ भागों में खून का संचार नहीं होने की स्थिति में लकवा हो जाता है।प्रमुख तौर पर खून का संचार धमनियों के जाम हो जाने से रुक जाना, दूसरा कारण धमनियों का फ ट जाना और खून का मस्तिष्क में बहाव हो जाना।

क्यों होता है?
मधुमेह, उक्त रक्तचाप, अधिक वसा युक्त भोजन करना, अत्यधिक मात्रा में नमक भोजन में उपयोग करना, धूम्रपान करना, अत्यधिक शराब का सेवन।

क्या हैं इसके लक्षण ?
मुंह का टेढ़ा पन बोलने में तकलीफ होना, एक तरफ के अंग का काम नहीं करना, मस्तिष्क के अंदर दो हिस्से होते हैं, अगर हमारा बायां हिस्सा प्रभावित हो गया है तो हमारे दाएं साइड के अंग काम नहीं करेगा। लकवा में मेडिकल इलाज के साथ फि जियोथेरेपी का भी बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है।