
टैक्स पर बवाल पर पराठा तो पराठा ही रहेगा ...
कोटा. भारत में करोड़ों लोग ऐसे है जिनके सुबह के नाश्ते की शुरूआत पराठे (Paratha ) से होती है। सर्दियों के मौसम में तो लोग तरह-तरह के पराठों को बड़े चाव से खाते हैं। लेकिन अचानक करोनाकाल में पराठा सुर्खियों में बना हुआ है, सोशल मीडिया (Social Media)पर यूजर मीम्स बनाकर शेयर कर रहे हैं। अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग (एएआर) की कर्नाटक बेंच के एक फैसले की वजह से ये सब हुआ है। आमतौर पर पराठे को रोटी का ही एक प्रकार माना जता है। लेकिन एएआर ने इसे रोटी का तरह मानने से इनकार करते हुए पराठे पर 18 फीसदी जीएसटी लगा दी है। हालांकि अभी इस फैसले का असर कर्नाटक के अलावा किसी अन्य राज्य पर नहीं पड़ेगा। गौरतलब है कि रोटी को 5 फीसदी जीएसटी (GST) के दायरे में रखा गया है।
सोशल मीडिया पर छाया पराठा
कर्नाटक सरकार इस फैसेले को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है। कुछ यूजर ने पराठे के अस्तित्व पर खतरा बताया। सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहने वाले उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने चुटकी लेते हुए कहा कि इस फैसले के बाद देसी जुगाड़ से 'परोटीस' (पराठा+रोटी) की नई किस्म तैयार हो सकती है।
जोधपुर-जयपुर के पराठे हैं प्रसिद्ध
यूं तो राजस्थान में दाल, बाटी-चूरमा को यहां का मुख्य भोजन माना जाता है लेकिन प्रदेश के हर कोने में पराठे बड़े शौक से बनाए और खाए जाते हैं। खासतौर पर जोधपुर और जयपुर में हर तरह के पराठे आसानी से मिल जाते हैं। जयपुर के मानसरोवर स्थित एक रेस्टोरेंट पर 32 इंच के आकार वाले पराठे मशहूर है। इन्हें खाने के लिए देश-विदेश से सैलानी आते हैं। जोधपुर में भी 50 अलग-अलग वैरायटी के पराठे मिलते हंै। कोटा में कई ऐसे पराठे सेंटर हैं, जो कोचिंग विद्यार्थियों के बीच बड़े लोकप्रिय है।
Updated on:
12 Jun 2020 11:26 pm
Published on:
12 Jun 2020 10:56 pm
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