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अंतराष्ट्रीय खेलो में कोटा का नाम रोशन करने के बावजूद हो रही है इनकी उपेक्षा

मैदान पर पसीना बहाकर कोटा का नाम रोशन करने वालों के साथ लम्बे समय से खिलवाड़ हो रहा है।

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कोटा .

मैदान पर पसीना बहाकर कोटा का नाम रोशन करने वालों के साथ लम्बे समय से खिलवाड़ हो रहा है। पहले जहां रेलवे कोटा स्तर पर ही खिलाडिय़ों को रेलवे में भर्ती किया करता था, अब ये अधिकार इनसे छिन गया है। रेलवे में भर्ती जबलपुर मंडल करता है। रेलवे में कोटा स्तर पर पिछले 20 साल से कोई भर्ती नहीं की गई है। इसके लिए यूनियनों ने कई बार प्रयास किया, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। इस कारण कोटा के खिलाडिय़ों की उपेक्षा हो रही है।

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हॉकी खिलाडिय़ों ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि कोटा में करीब 10 से अधिक अन्तरराष्ट्रीय खिलाड़ी हुए जिन्होंने कोटा का नाम रोशन किया। उसके बाद भी यहां हॉकी खिलाडिय़ों को कोई सुविधा नहीं दी जा रही। रेलवे में पिछले 20 सालों से स्पोट्र्स कोटे से एक भी भर्ती नहीं की गई।

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कोटा से निकले अन्तरराष्ट्रीय खिलाड़ी
कोटा से हॉकी के कई अन्तरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकले, जिसमें ध्यानचंद के पुत्र अशोक कुमार व माइकल किंडो शामिल हैं। दोनों ही खिलाडिय़ों ने कोटा में रहते हुए 1975 के वल्र्ड कप में भाग लिया। इस वल्र्ड कप फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को 2-1 से मात दी थी। इसके साथ ही प्रकाश कौशिक, सुभाष मेहरा, सतीश मेहरा, एमपी सिंह, मोहम्मद युनूस, चन्द्रपाल, काबुल सिंह ने भी भारत का प्रतिनिधित्व किया, ये सभी खिलाड़ी कोटा से हैं।

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रेलवे स्पोट्र्स ग्राउंड का किराया कम
खेल को विकसित करने व खिलाडिय़ों को तैयार करने के लिए रेलवे स्पोट्र्स ग्राउंड का किराया रेलवे ने कम कर दिया है। पहले ये किराया 11 हजार रुपए प्रतिदिन हुआ करता था, जिसे घटाकर 5 हजार कर दिया है। कोटा, भोपाल, जबलपुर में भी खेल मैदानों का किराया समान कर दिया है।

कोटा रेल मंडल खेलकूद अधिकारी डॉ. आर.एन. मीणा ने बताया कि पहले खिलाडिय़ों की भर्ती का अधिकार कोटा को था। अब यह अधिकार जबलपुर जोन को दिया गया है। इस कारण यहां से भर्ती नहीं हो रही। खेल को बढ़ावा देने के लिए रेलवे ग्राउंड का किराया कम कर दिया है।