
फोटो-पत्रिका
कोटा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सच्ची और नैतिकतापूर्ण पत्रकारिता समाज और सरकार के लिए दर्पण का काम करती है। मीडिया एक ऐसा माध्यम है, जो समाज के अभावों व कठिनाइयों को सामने लाता है और समाज को विभिन्न प्रकार की चुनौतियों के प्रति सजग करता है। वहीं समाज की पीड़ा और समाज के चिंतन के प्रति सरकार को आगाह कर उसे सामाजिक समस्याओं के समाधान के प्रति जवाबदेह बनाने की जिम्मेदारी भी पूरा करता है।
बिरला पत्रिका समूह के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश की जन्मशती वर्ष के तहत आयोजित कार्यक्रमों की शृंखला में रविवार को कोटा में ‘पत्रिका की-नोट’ के तहत ‘लोकतंत्र और मीडिया’ विषय पर मंथन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की उपस्थिति में बिरला ने कहा कि मीडिया में आए समाचार यदि सत्य और नैतिकता पर आधारित हैं तथा समाज के अभावों, चुनौतियों और कठिनाइयों की प्रतिध्वनि हैं तो प्रत्येक राजनीतिक-सामाजिक व्यक्ति का दायित्व है कि उसका संज्ञान ले। इसके साथ ही समाधान की दिशा में गंभीरता से प्रयास करे।
बिरला ने कहा कि राजस्थान पत्रिका के लिए पाठक ही सर्वोपरि है। पत्रिका पाठकों के विचार, भावनाएं, समस्याएं, चुनौतियां, अभावों का ध्यान रखता है। दूरदराज के गांवों के वंचितों की आवाज भी बनता है। पत्रिका निर्भीक होकर, बिना भय के अपनी नैतिक बात रखता है। पत्रिका सरकार या व्यावसायिक घरानों के प्रति जिम्मेदार नहीं है, बल्कि पत्रिका की जिम्मेदारी तो केवल पाठकों के प्रति है। कई उतार चढ़ाव आए, लेकिन पत्रिका ने अपनी नैतिकता नहीं छोड़ी। जनता के ज्वलंत मुद्दों को प्राथमिकता दी, इसके लिए सरकार के दबाव भी झेले। चाहे विज्ञापन मिले या नहीं मिले, पत्रिका ने पाठकों का ध्यान रखा।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि पाठक सबसे पहले राजस्थान पत्रिका पढ़ता है। पाठक को पता होता है कि उसकी बात पत्रिका में जरूर आई होगी। पत्रिका संपूर्ण समाज का दर्पण है। बिरला ने कहा कि कई बार राजनेता अखबार को अपना विरोधी मानने लग जाते हैं, लेकिन उनको यह ध्यान रखना चाहिए कि अखबार समय-समय पर समाज के अभाव और विचारों से राजनेताओं को अवगत कराता है। इसलिए अखबार की ऐसी खबरों को उनको सकारात्मक दृष्टि से देखना चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी ने कहा कि जिस तरह लोकतंत्र जनता के लिए, जनता के द्वारा है, उसी तरह मीडिया भी जनता के लिए है। आप जैसा चाहेंगे, मीडिया वैसे ही चलेगा। आप इसकी चाबी अपने पास रखें। सबकी चाबी जनता के पास है। यह संकल्प लें कि अपने जन्म दिवस पर एक आरटीआइ जरूर लगाएं। संवाद क्या है, मैं आपसे बात कर रहा हूं, कौन बोल रहा है और कौन सुन रहा है।
पत्रकारिता साधारण घटना नहीं है। संवाद आत्मा से होता है और आत्मा का ही होता है। आत्मा की अभिव्यक्ति आत्मा तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली पैकेज आधारित हो गई है। इसी कारण विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं।
मीडिया भी इसी समाज का ही भाग है। इस दूषित शिक्षा प्रणाली ने मीडिया जगत के दृष्टिकोण को भी बाधित कर दिया है। लोकतंत्र के तीन ही स्तंभ हैं, मीडिया यदि चौथा स्तंभ बनने का प्रयास करेगा तो वह सरकार का भाग बन जाएगा, जिसका नुकसान जनता को होगा। मीडिया का काम लोकतंत्र के इन स्तंभों पर नजर रखते हुए उन्हें सकारात्मक दिशा दिखाना है। सरकार का भाग बनने पर मीडिया की जनता और सरकार के बीच सेतु की भूमिका समाप्त हो जाएगी। यहां जनता की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
Updated on:
21 Dec 2025 10:04 pm
Published on:
21 Dec 2025 04:51 pm
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