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यहां खेत जाने के लिए दे रहे ‘टोल

- कमोलर क्षेत्र के किसानों की पीड़ा

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कोटा

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Anil Sharma

Nov 23, 2020

moikalan, kota

मोईकलां. इस टोल से गुजरते है कमोलर क्षेत्र के किसान।

मोईकलां. स्टेट या मेगा हाइवे से गुजरते समय टोल देना पड़े तो बात समझ आती है। किसान को खेत तक वाहन ले जाने के लिए भी टोल चुकाना पड़े तो सोचने वाली बात है। कमोलर पंचायत क्षेत्र के किसानों के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है।
कैथून-धरनावदा स्टेट हाइवे ५१ पर कमोलर कस्बे के नजदीक स्थित बोरदा टोल नाके से गुजरने वाले किसानों की परेशानी भी निराली है। कमोलर की पूर्व सरपंच लीलाबाई सुमन, किसान गोविन्द सुमन, नरेन्द्र जैन, लालचन्द शर्मा व प्रभुलाल नागर ने बताया कि भाजपा शासन में भी किसानों व वाहन चालकों ने टोल वसूली का विरोध करते हुए स्टेट हाइवे पर जाम लगाया था। कमोलर के कई किसान टोल के उस पार खेती करते हैं। इसी तरह उस पार के कई किसान भी कमोलर के माळ में मुनाफे की खेती करते है। किसानों को एक से दो किमी दूरी स्थित खेत पर जाने के लिए भी जीप या कार का टोल देना पड़ता है।
सरपंच मेघा गौतम व अन्य किसानों ने बताया कि १० किमी के दायरे में आने वालों का टोल तो सरकार को माफ करना चाहिए। क्षेत्रवासियों को मिले राहतबपावर सरपंच रवि कुमार गुप्ता, खडिय़ासरपंच बबलू बना, मोईकलां सरपंच प्रदीप मेरोठा, लटूरी सरपंच मनीषधाकड़ व लबानिया अरुणा मारन ने बताया कि लोगों व जनप्रतिनिधियों को हर दिन सांगोद जाना पड़ता है। बपावर से १५ किमी की दूरी तय करने के लिए टोल देना पड़ रहा है। आरएसआरडीसी के अधिकारियों का कहना है कि टोल सरकार के आदेश से शुरु किया गया है। पूर्व में सरकार ने निजी वाहनों को टोल मुक्त कर दिया था। सरकार से कोई आदेश आता है तो उसकी पालना जरूर की जाएगी।
& कमोलर, बपावर, खडिय़ा, लबानिया, लटूरी व मोईकलां पंचायत क्षेत्र से आने वाले हर वाहन चालक का टोल माफ होना चाहिए। क्योंकि उपखण्ड मुख्यालय पर संचालित किसी ना किसी कार्यालय पर लोगों का काम पड़ता ही रहता है। ऐसे में लोकल वाहन चालकों को इतनी राहत तो मिलनी ही चाहिए।
कृष्णमुरारी गोचर, कांग्रेस, अध्यक्ष लटूरी।