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सांगोद. मौसमी बीमारियों एवं डेंगू से जूझते चिकित्सा विभाग के लिए अब यहां एक नई बीमारी ने चिंता बढ़ा दी है। डेंगू के बाद अब कस्बे में स्क्रब टाइफस ने भी दस्तक दे दी है। यहां बीते तीन दिनों में दो जनों में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई है। दोनों मरीजों का इलाज बीते दो दिनों से कोटा के निजी अस्पताल में चल रहा है। ऐसे में लोगों की चिंता भी बढ़ती जा रही है।
चिकित्सकों ने बताया कि स्क्रब टाइफस पिस्सुओं के संपर्क में आने से होता है तथा इस बीमारी में भी डेंगू की तरह प्लेटलेट्स की संख्या घटने लगती है। यह बीमारी संक्रामक तो नहीं है, लेकिन इसकी वजह से शरीर के कई अंगों में संक्रमण फैलने लगता है। सांगोद निवासी महावीर माली व प्रभूलाल के बुखार होने पर परिजन कोटा के निजी अस्पताल में ले गए। जांच के बाद दोनों के स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई है। वहीं दूसरी ओर कस्बे में डेंगू का प्रकोप भी बढ़ता जा रहा है। हालांकि चिकित्सा विभाग डेंगू फैलने की बात से इंकार कर रहा है। लेकिन निजी जांच केंद्रों पर एक दर्जन से अधिक मरीजों के प्लेटलेट्स में कमी सामने आई है। इनमें अधिकांश लोगों का उपचार कोटा के अस्पतालों में हुआ है। हैरत वाली बात तो यह है कि यहां डेंगू जांच सुविधा तक नहीं है।
- बचाव ही एकमात्र उपाय
चिकित्सकों की माने तो इस रोग से बचने का कारगर उपाय अभी तक नहीं बना। लेकिन कुछ तरीके हैं जिनसे इस रोग से बचा जा सकता है। यह रोग ज्यादातर कीड़ों के माध्यम से ही फैलता है। इसलिए जरूरी है कि घरों के आसपास झाडिय़ां और घास न पनपने दें। गार्डन में कीड़ों का प्रकोप है तो उचित दवा के इस्तेमाल से नियंत्रण में रखें। गार्डन और पेड़ पौधों से युक्त जगह में इस रोग के प्रसार के समय जाने से बचे।
-- ऐसे फैलता है रोग
स्क्रब टाइफस रोग की मुख्य वजह खेतों या अन्य जगहों पर जंगली पौधे या घने घास में पाए जाने वाला पिस्सु कीट है। इसके काटने से उसके लार में मौजूद खतरनाक जीवाणु रिक्टशया सुसुगामुशी मनुष्य के रक्त में फैल जाता है। इसकी वजह से लीवर, दिमाग व फेफड़ों में कई तरह के संक्रमण होने लगते हैं। मरीज को तेज बुखार, खांसी, सिर दर्द व शरीर में कमजोरी आने लगती है। पिस्सु के काटने वाली जगह पर फफोलेनुमा काली पपड़ी जैसा निशान बन जाता है। मरीजों में लीवर व किडनी ठीक से काम नहीं कर पाते। जिसे तबीयत बिगडऩे पर मरीज बेहोशी की हालत में चला जाता है।
- स्क्रब टाइफस मरीज की जानकारी है जिनका उपचार कोटा चल रहा है। डेंगू जैसे संदिग्ध लक्षणों वाले मरीज भी आ रहे हैं जिनकी प्लेटलेट्स काफी कम आ रही है। सबसे बड़ी समस्या यहां अस्पताल में डेंगू जांच किट नहीं होने से आ रही है।
- डॉ. आरसी पारेता अस्पताल प्रभारी सांगोद
Published on:
02 Oct 2021 05:24 pm
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