
Opinion : सपनों पर भारी सियासत, कंक्रीट ले रही जीवन की परीक्षा
के.आर. मुण्डियार
स्मार्ट सिटी कोटा की जनता इन दिनों बेहाल सड़कों पर भारी तकलीफें झेल रही है। शहर की अधिकतर सड़कें या तो खुदी पड़ी हैं या बरसात के बाद पूरी तरह से उखड़ चुकी हैं। हालात इतने खराब है कि लोग अफसरों व विकास एजेंसियों को कोसते हुए नहीं थक रहे। बड़ा सवाल है कि विकास की दिशा में अग्रसर राज्य के तीसरे बड़े शहर कोटा में ऐसे दयनीय हालात क्यों बने। सड़कों की दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार है।
राज्य से लेकर केन्द्र सरकार तक कोटा के राजनीतिक नेतृत्व की धाक है। इस नेतृत्व की बदौलत ही कोटा की जनता विकास के सपने देख रही है, लेकिन सपनों पर भारी सियासत के कारण जनता को राहत देने के प्रयास सड़कों पर ही चौपट होते दिख रहे हैं।
ज्ञात है कि पिछले दिनों आई बाढ़ ने कोटा शहर में बीते सालों में हुए बेतरतीब विकास की पोल खोल दी। कई कॉलोनियां व बस्तियां जलभराव की चपेट में आ गई। औसत से थोड़ी अधिक बरसात ने स्मार्ट सिटी की सड़कों की हालात बिगाड़ दी। अधिकतर सड़कों से डामर पानी के साथ बह गया। कंक्रीट निकल आने से लोगों की राह मुश्किल हो रही है। गुमानपुरा सहित मुख्य बाजारों की सड़कें टूटी होने से दुकानदारों का व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। कई सड़कें तो सीवरेज लाइन बिछाने के कारण ही अनियोजित तरीके से उखाड़ दी गई। अब ये सड़कें आए दिन लोगों के जीवन की परीक्षा ले रही हैं।
बड़ा सवाल यह है कि क्या शहर की दयनीय स्थिति जिम्मेदार विभागों के आला अफसरों व जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को दिखाई नहीं दे रही। यदि वो सबकुछ देख पा रहे हैं तो जनता को तात्कालिक राहत देने के प्रयास क्यों नहीं कर रहे। इसके अलावा सीवरेज लाइन बिछाने वाले ठेकाकर्मियों ने उखड़ी सड़कों की मरम्मत सही तरीके से नहीं की तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।
सवाल तो यह भी है कि क्या स्मार्ट सिटी कोटा की सड़कों की क्वालिटी इतनी घटिया (bad quality of roads ) ही थी, जो औसत से थोड़ी अधिक बरसात नहीं झेल पाई। जो सड़कें टूट चुकी हैं, ये किन लापरवाह अफसरों व इंजीनियर की निगरानी में बनाई गई थी। इसमें कोई दो राय नहीं कि ऐसी सड़कें अफसरों की मिलीभगत या बिना कमीशन के नहीं बनी होंगी।
सवाल है कि जब ये सड़कें बन रही थी तब जिम्मेदार विकास एजेंसी व निकाय के जिम्मेदार अफसर व सलाहकार क्या कर रहे थे। किन-किन ठेका फर्म ने घटिया सड़कें बनाई। इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। अब जनता से विकास के वादे करने वाले जनप्रतिनिधियों को भी जनता की तकलीफों में साथ खड़ा होना होगा। जनप्रतिनिधि आगे आकर संबंधित विभागों से अविलम्ब सड़कों की मरम्मत शुरू करवाएं। जब बरसात का दौर थम जाए, तब विशेष निगरानी में गुणवत्ता के साथ सड़कों का नवनिर्माण किया जाना चाहिए।
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kr.mundiyar@epatrika.com
Published on:
27 Aug 2021 06:15 pm
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