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सकारात्मक छवि पुलिस का नया युग

राजस्थान के कोटा में तैनात अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मिताली गर्ग पुलिस की वर्किंग और सुधारों को नए नजरिए से देख रही हैं। उनका कहना है सकारात्मक छवि पुलिस में एक नए युग के सृजन का प्रतीक है। जो पुलिस कर्मियों को किसी भी कीमत पर धूमिल नहीं होने देनी चाहिए।

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rps Mithali Garg

Additional Superintendent of Police Mithali Garg

कोटा. कोरोना दौर में एक ओर व्यक्ति बाहर के वातावरण से संघर्ष कर रहा है, वहीं वह अपने अंदर भी संघर्ष कर रहा है। इस संकट में मेडिकल स्टाफ के साथ महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाली पुलिस फोर्स भी एक अनदेखे संकट से गुजर रही है।

पुलिसिंग में रातोंरात कार्यप्रणाली बदलने की दुविधा है। अचानक आई जिम्मेदारी को सामाजिक दूरी के साथ क्रियान्वित करना चुनौतीपूर्ण है। पुलिस वर्दी के अनेक हिस्से जैसे व्हिसल कोर्ड, बैरेल कैप, स्टार, अशोक स्तंभ, नेम प्लेट, बेल्ट को नियमति रूप से सेनेटाइज करने की आवश्यकता है। पहले औसतन एक सिपाही एक वर्दी 3 दिवस में धोता था, लेकिन अब प्रत्येक दिन ड्यूटी के पश्चात वर्दी को धोना आवश्यक है। सिपाही थानों व पुलिस लाइन बैरक में एक साथ रहते हैं। एक-दूसरे के बैडिंग का भी प्रयोग कर लेते हैं, जो खतरनाक हो सकता है।
अपराधियों को पकडऩा एवं लम्बे समय तक उसके संपर्क में रहना स्थिति को गंभीर बनाता है। नाकाबंदी, गश्त, दबिश के दौरान ड्यूटी प्वॉइंट पर ही खान-पान करना पड़ता है। हर कार्य क्षेत्र को सेनेटाइज करना चुनौती है। उससे भी बड़ी चुनौती है सेनेटाइजेशन मानकों का प्रत्येक दिन पालन करना। जहां एक ओर आम आदमी परिवार के साथ कोरोना से बचाव के लिए घरों में लॉक है, वहीं पुलिस फोर्स का अधिकांश हिस्सा 3 माह से कोरोना ड्यूटी के कारण घर भी नहीं जा पाया, जो तनाव का कारण बन रहा है। कई पुलिस कर्मियों ने ड्यूटी के दौरान अनजाने में संक्रमित होकर परिजनों को भी संक्रमित किया है। इन जिम्मेदारियों ने पुलिसकर्मी को न केवल तनाव दिया, बल्कि शंका, बैचेनी व अनिश्चितता भी दी है। यही कारण है कि देशभर से पुलिसकर्मियों द्वारा आत्महत्या करने की खबर पढ़ रहे हैं।

देशभर में सैकड़ों पुलिसकर्मी कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। कई अपनी जान गंवा बैठे हैं, लेकिन मनुष्य प्रवृत्ति यह है कि वह हर अंधेरी रात में एक छोटी सी उम्मीद की किरण ले ही आता है। महामारी काल में भी पुलिंिसंग ने अपने लिए नई आशा की किरणें ढूंढ़ ली हैं। जहां धार्मिक व राजनीतिक समारोह, वीआईपी विजिट, धरना, प्रदर्शनों इत्यादि में अत्यधिक पुलिस जाप्ता लगाया जाता था, जो कि इस संकट काल में सीमित हो गया है। इसके फलस्वरूप पुलिसकर्मियों को वास्तविक पुलिसिंग के लिए अधिक समय मिल रहा है।
यह सत्य है कि इस काल में ऑनलाइन धोखाधड़ी, घरेलू हिंसा, आत्महत्या, चोरी, संपत्ति विवाद बढऩे की चुनौती है, लेकिन एक दूसरे नजरिए से देखे तो समग्र पुलिस फोर्स की छवि में जबरदस्त सुधार हुआ है। पुलिस की ड्यूटी व सामाजिक सरोकार के प्रयासों को आमजन द्वारा सराहा गया है। इस समय घर की चारदीवारी में सुरक्षित लोगों ने अपने मोहल्ले के चौराहों पर धूप में खड़े पुलिसकर्मी को देखकर उसकी कठिन ड्यूटी व जज्बे को समझा है। कोरोना योद्धा के रूप में उनका सम्मान किया है। पुलिस को भी आपदा में सेवा करने का चुनौतीपूर्ण अवसर मिला है। जिसे पुलिस महकमे ने डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ व सफ ाई कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर स्वीकार किया है। इस प्यार, सम्मान, सराहना व उत्कृष्ट छवि को अब सैदव के लिए बनाकर रखना पुलिस के लिए आज सबसे बड़ी चुनौती है। सकारात्मक छवि पुलिस में एक नए युग के सृजन का प्रतीक है। जो पुलिस कर्मियों को किसी भी कीमत पर धूमिल नहीं होने देनी चाहिए।