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रेलवे को बेचने की साजिश बर्दाश्त नहीं, लड़ेगे आर-पार की लड़ाई

एनएफआईआर/वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे मजदूर संघ ने किया आर-पार की लड़ाई का ऐलान

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रेलवे को बेचने की साजिश बर्दाश्त नहीं, लड़ेगे आर-पार की लड़ाई

रेलवे को बेचने की साजिश बर्दाश्त नहीं, लड़ेगे आर-पार की लड़ाई

कोटा. रेलवे की प्रगति व संचालन के संबंध में आयोजित संगोष्ठी में नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन्स (एनएफआईआर) ने रेलवे के निजीकरण को लेकर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के समक्ष विरोध जताया है। मंडल सचिव अब्दुल खालिक ने बताया कि गुरुवार को आयोजित संघोष्ठी में एनएफआईआर के महामंत्री डॉ.एम. राघवैय्या ने कहा कि चरण बद्ध तरीके से रेलवे का निजीकरण किया जा रहा है। निजीकरण व मल्टी स्कीलिंग व्यवहारिक नहीं है।
इसे किसी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रेलवे के रिक्त पदो का 50 प्रतिशत सरेन्डर करना, पिछले दो साल के भर्ती के मांग पत्र व पेैनल की समीक्षा कर घटाना, एक्ट अप्रेंटिस को रद्द करने का कड़ा विरोध दर्ज किया । उन्होंने कहा कि लार्जेस स्कीम के तहत उनके बच्चों को नौकरी देने का विस्तार, एलडीसीई ओपन टू ऑल करना आवश्यक है ।


उन्होंने कहा कि ठेकेदारी प्रथा में लगातार काम की क्वालिटी का स्तर घट रहा है तथा उनका शोषण भी हो रहा है । एनएफआईआर/डब्ल्यू.सी.आर.एम.एस. ने वरिष्ठ पर्यवेक्षकों को निर्णय के अनुसार 4800 ग्रेड पे देना , लोको पायलट का 4600 ग्रेड पे देना रेल कर्मियों के महंगाई भत्तों को फ्रीज किए निर्णय को वापिस लेते हुए पुन: लागू करना , टीए की कटौती पर लगी रोक हटाना आदि मुद्दो का समाधान अविलम्ब होना चाहिए । श्री भटनागर ने कहा कि कोविड - 19 से पूरे भारतीय रेल में लगभग 315 रेल कर्मी शहीद हो चुके है ।
कार्यकारी अध्यक्ष डॉ आर.पी. भटनागर ने कहा कि कोरोना वॉरीयर्स के समान कोरोना वॉरीयर्स इंश्योरेंस के तहत रेल कर्मियों को भी शामिल करना चाहिए । 109 रूट पर चलने वाली 150 ट्रेनों को पूंजीपतियों के हाथों में सौपने का विरोध करते हुए अशोक शर्मा ने मांग की सभी स्टेशनों पर कार्यरत रेलकर्मियो का कोरोना टेस्ट करना चाहिए । रेल कार्यालयों में स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशानुसार कर्मचारियों के मध्य आवश्यक सामाजिक दूरी का भी क्रियान्वयन सुनिश्चित होना चाहिए । रेलवे के फ्रन्ट स्टॉफ ट्रेकमेंटेनर्स , एसएण्डटी, रनिंग स्टॉफ , विद्युत, इंजीनियरिंग आदि स्टॉफ के मध्य सोशल दूरी का पालन सुनिश्चित न करने के अलावा, रनिंग रूम, रेस्ट रूम, रेलवे कॉलोनी आदि निजीकरण एक आत्मघाती कदम है । लॉकडाउन व कोरोना काल में 7 लाख से अधिक रेल कर्मियों ने निर्धारित रूट पर लगातार काम किया है, जिसको रेल राज्य मंत्री सुरेश अगाड़ी ने भी माना है कि विपरीत परिस्थितियों में रेलकर्मियों का अतुलनीय योगदान रहा है । रनिंग स्टॉफ के ए.एल.के. का भुगतान निर्मित रूप से करने आदि की मांग को डॉ. भटनागर ने पूरे जोर तरीके से रखते हुए कहा कि हमें रेल राजस्व को बढाने के लिए स्थायी रेल कर्मियों की सेवा ही लेते हुए ठेकेदारी प्रथा को तत्काल बंद करना ही रेल हित में होगा । भटनागर ने कहा कि रेल कर्मियों की ज्वलंत समस्याओं से रेल मंत्री को अवगत कराया।

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बैठक में लिए महत्वपूर्ण निर्णय

कोटा । केन्द्रीय कर्मचारी हित निधि समिति की बैठक जबलपुर में सम्पन्न हुई। इस बैठक में रेलकर्मचारी व उनके परिवारजनों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गए।
01. तीनों मंडलो से प्राप्त 1830 कर्मचारियों के आवेदन पर उनके बच्चों को टेक्नीकल एवं प्रोफेशनल कोर्सेस की पढ़ाई हेतु 18000रू. प्रत्येक बच्चे को स्कालरशिप स्वीकृत की गई ।
02. मुख्यालय की कैंटीन का कार्यकाल 06 माह बढ़ाया गया।
03. कर्मचारियों के दिव्यांग आश्रितों को आर्थिक सहायता हेतु कुल 360 आवेदन प्राप्त हुए थे । उन सभी आश्रितों की देखभाल हेतु 360 कर्मचारियों को 5000 रू. की राशि स्वीकृत
04. कोविड-19 के चलते दिव्यांग कर्मचारियों को आर्थिक सहायता रेलवे बोर्ड से कम फंड रिलीज होने के कारण इस वर्ष स्वीकृत नहीं हो पा रही है।
05. तीनों मंडलों को निर्वाह अनुदान हेतु 5-5 लाख रू. व दांत और चश्मे की प्रतिपूर्ति के लिए 02-02 लाख रू. स्वीकृत
06. मुख्यालय एवं दोनो वर्कशॉप के लिए निर्वाह अनुदान हेतु 1.5-1.5 लाख रू , दांत व चश्मे की प्रतिपूर्ति हेतु 50-50 हजार स्वीकृत