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आरटीयू  कोटा. : बेशर्मी की क्लास में नई स्टूडेंट की एंट्री, प्रोफेसर के घर जाकर मिड टर्म टेस्ट की कॉपियां चेक करती थी ईशा

आरटीयू कोटा के एसोसिएट प्रोफेसर, सहयोगी छात्र व छात्रा को जेल भेजा

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कोटा. राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में नम्बर बढ़ाने की एवज में छात्रा से इज्जत मांगने के मामले के बेशर्म घटनाक्रम में एसआईटी की टीम ने बुधवार शाम को एक छात्रा ईशा यादव को और गिरफ्तार किया है। छात्रा को आरोपी एसोसिएट प्रोफेसर गिरीश परमार और सहयोगी छात्र अर्पित अग्रवाल को अदालत के पेश किया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया।

एसआईटी टीम प्रभारी व उप अधीक्षक अमर सिंह ने बताया कि छात्रा ने 20 दिसम्बर को एसोसिएट प्रोफेसर गिरीश परमार (47) व अर्पित अग्रवाल (22) के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था। अनुसंधान के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। इस बीच एक और छात्रा ने दोनों आरोपियों के अलावा एक छात्रा ईशा यादव (20) के खिलाफ भी रिपोर्ट दी थी। पुलिस ने अनुसंधान के बाद ईशा को भी गिरफ्तार कर लिया। वहीं रिमाण्ड अवधि पूरी होने पर आरोपी गिरीश परमार, अर्पित अग्रवाल व छात्रा ईशा को न्यायालय में पेश किया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया।

ब्रांडेड कपड़ों का शौकीन

एसोसिएट प्रोफेसर गिरीश परमार रंगीन मिजाज था। घर में खुशबू हो इसके लिए सुंगधित अगरबत्ती लगाता था। महंगे पैन व ब्रांडेड कपड़ों का शौकीन था। बाजार से जो भी शॉपिंग करता, अर्पित के माध्यम से ही करता था। प्रोफेसर ने उसे क्रेडिट कार्ड दे रखा था। साथ ही रुपए भी देता था। बाद में खरीदारी के एक-एक पैसे का हिसाब अर्पित से मांगता था। गलती होने पर डांटता भी था।

जब्त दस्तावेज व ऑडियो की करेंगे जांच

आरोपी गिरीश परमार के साथ षडय़ंत्र में छात्रा ईशा भी शामिल रही है। उसे गिरफ्तार किया गया है। आरोपी गिरीश परमार के घर से जब्त किए दस्तावेजों व आरोपी अर्पित के मोबाइल से मिले ऑडियो के सम्बंध में जांच की जाएगी।

लेंगे वाइस सैंपल

आरोपी गिरीश परमार, अर्पित अग्रवाल व ईशा यादव को 10 जनवरी तक जेल भेज गया है। आगे आरोपियों की वाइस सेंपलिंग ली जाएगी। इसको एसएफएल भेजा जाएगा। फिर आरोपियों के ऑडियो से मिलान किया जाएगा।

हितेश जैन, विशिष्ट लोक अभियोजक

जांच में सामने आया कि प्रोफेसर द्वारा दी गई मिड टर्म टेस्ट की कापियों को ईशा यादव चेक करती थी। प्रोफेसर के घर पर ही टेस्ट की कापियां चेक होती थी तथा उनमें नम्बर भरे जाते थे। किस कॉपी को खाली रखना है तथा किसको भरना है, यह सब प्रोफेसर तय करता था। इसमें अर्पित व ईशा सहयोग करते थे। एसआईटी की टीम को प्रोफेसर के घर 30 कॉपियां मिली थी। कुछ खाली कापियों में भी नंबर दिए गए थे।