
राजस्थान में किसानों को सिंचाई के लिए मिलेगी मुफ्त बिजली, विद्युत निगम को बेचने पर मिलेगा पैसा, योजना में जल्दी करें आवेदन
रावतभाटा. खेतों में सिंचाई के लिए किसान अब विद्युत निगम से बिजली लेने के साथ-साथ बेच भी सकते हैं। उन्हें केवल अपने खेतों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर बिजली का उत्पादन करना होगा। उक्त बिजली का उपयोग खेतों में सिचाई के लिए करना होगा। इसके बाद शेष बची बिजली विद्युत वितरण निगम को बेच भी सकते हैं। इसके लिए किसान को बकायदा आरईआरसी की ओर से निर्धारित दर पर राशि भी मिलेगी, लेकिन उक्त योजना का लाभ केवल वे ही किसान उठा सकते हैं, जिनके पास वर्तमान में कृषि कनेक्शन हैं और उनके खेतों में 3 से 7.5 एचपी की मोटर लगी है।
राज्य सरकार ने किसानों के लिए गत जुलाई माह में कुसुम योजना (किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) शुरू की है। योजना के तहत जिन किसानों के पास कृषि कनेक्शन हैं। उनके खेतों में 3, 5 या 7.50 एचपी की मोटर सिंचाई के लिए लगी है, वे विद्युत वितरण निगम में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए केन्द्र व राज्य सरकार 30-30 प्रतिशत राशि देगी। इसके अलावा इतनी ही राशि का लोन किसानों को डिस्कॉम देगा। शेष 10 प्रतिशत उन्हें स्वयं वहन करना होगा, जो लगभग 4 हजार रुपए प्रति किलोवाट होगा।
लगेंगे उपकरण
विद्युत वितरण निगम के अधिकारियों का कहना है कि योजना में 3 एचपी की क्षमता वाले पम्प पर 5 किलोवाट, 5 एचपी की क्षमता वाले पम्प पर 10 किलोवाट व 7.5 एचपी की क्षमता वाले पम्प पर 15 किलोवाट का सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया जाएगा।
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पहलेे देनी होगी राशि
किसानों को आवेदन स्वीकृत होते ही 10 प्रतिशत राशि 4 हजार रुपए प्रतिकिलो वाट के हिसाब से विद्युत निगम में जमा करानी होगी। यदि किसान 5 किलोवाट का सौर ऊर्जा संयंत्र लगाता तो उसे 4 हजार रुपए प्रति किलोवाट के हिसाब से 20 हजार, 10 किलोवाट पर 40 हजार व 15 किलोवाट का संयंत्र लगाने के लिए 60 हजार रुपए जमा कराने होंगे। यदि किसान अतिरिक्त बिजली बनाकर बेचता है तो विद्युत विनियामक आयोग से निर्धारित दर से बेचने से प्राप्त राशि को दो भागों में बांटा जाएगा। एक हिस्सा उपभोक्ता व दूसरा हिस्सा लोन की किश्त चुकाने में काम आएगा।
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किसानों को यूं होगा फायदा
विद्युत निगम के अधिकारियों का कहना है कि यदि किसान उक्त योजना में आवेदन करते हैं तो उन्हें मुफ्त में सिंचाई के लिए बिजली मिलेगी। अतिरिक्त बिजली बनाकर ग्रिड को बेचते हैं तो उसके बदले भुगतान होगा।
किसानों को सिंचाई के लिए दोपहर को बिजली मिलेगी। किसान की ओर से उक्त योजना पर किया खर्च लगभग 3 वर्ष में वसूल हो जाएगा।
ऐसे करें आवेदन
योजना में आवेदन के लिए बिजली बिल, आधार कार्ड व बैंक की पासबुक खाते के विवरण सहित जेरोक्स जमा करानी होगी।
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अलग से लगेगा मीटर
किसानों के खेतों में एक अलग से मीटर लगेगा। इस मीटर को निगम की लाइनों से जोड़ा जाएगा। इससे यह पता चलेगा कि किसान ने कितनी बिजली निगम को दी है। उसके यूनिट के हिसाब से किसानों को राशि का भुगतान किया जाएगा। यह राशि किसानों के बैंक खातों में जमा करा दी जाएगी।
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कुसुम योजना के तहत खेतों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाएंगे। इससे उत्पन्न होने वाली बिजली से किसान मोटर चलाकर खेतों में सिंचाई कर सकता है। बाकी बची बिजली निगम को बेच सकता है। इससे किसान को आय भी होगी।
राजेन्द्र नामदेव, जेईएन, विद्युत वितरण निगम, अजमेर
Published on:
20 Aug 2019 12:46 pm
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