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सहकारी संस्थाओं के माध्यम से उचित किराये पर मिलेंगे कृषि यंत्र

राज्य सरकार ने विशेष कार्य योजना तैयार की

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सहकारी संस्थाओं के माध्यम से उचित किराये पर मिलेंगे कृषि यंत्र

सहकारी संस्थाओं के माध्यम से उचित किराये पर मिलेंगे कृषि यंत्र

कोटा. खेती की लागत घटाने के लिए सरकार ने विशेष कार्य योजना तैयार की है। किसानों को अब खेती-किसानी के लिए ट्रैक्टर व अन्य कृषि यंत्र खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि गांव के आसपास ही न्यूनतम किराए पर उपलब्ध करवाए जाएंगे। इसके लिए सहकारी संस्थाओं के माध्यम से कस्टम हायरिंग केन्द्र खोले जाएंगे। हाड़ौती में नौ तथा पूरे प्रदेश में सौ केन्द्र खोले जाएंगे। राष्ट्रीय कृषि विस्तार एवं प्रौद्योगिकी मिशन (एनएमएईटी) के सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन (एसएमएएम) के तहत अभिलक्षित गांवों में क्रय-विक्रय सहकारी समितियों तथा ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से कस्टम हायरिंग केन्द्रों की स्थापना की जाएगी। इन केन्द्रों पर ट्रैक्टर मय आवश्यक कृषि यंत्रों की क्रय लागत का 80 प्रतिशत अधिकतम 8 लाख रुपए का अनुदान दिया जाएगा। योजना का क्रियान्वयन सहकारिता विभाग के माध्यम से किया जाएगा। सहकारिता विभाग ने 30 जिलों से प्राप्त प्रस्तावों में से 100 क्रय-विक्रय सहकारी समितियां तथा ग्राम सेवा सहकारी समितियों का चयन कर लिया है। इसके लिए सहकारिता विभाग को 8 करोड़ रुपए की अनुदान राशि बतौर अग्रिम हस्तान्तरित की गई है। इससे सीमित आय के कारण उन्नत एवं महंगे कृषि उपकरण खरीदने में सक्षम नहीं होने वाले किसानों तक कृषि यंत्रों की पहुंच होगी। उन्हें अपनी आवश्यकता एवं समयबद्ध कृषि क्रियाओं को पूर्ण करने के लिए आधुनिक एवं महंगे कृषि यंत्र उचित किराये पर उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही, एक ही स्थान पर खाद, बीज तथा अन्य सामग्री सहित समस्त आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित हो जाएगी। आदान लागत में कमी होने से काश्तकार की आय बढ़ेगी।