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Ram Mandir…5 दिन जेल में रखा, रात में ट्रकों में भरकर जंगलों में छोड़ा, फिर भी पहुंचे अयोध्या

वर्ष 1990 और 1992 में जो कार सेवक विकट परिस्थितियों में भी अयोध्या पहुंचे और घटनाक्रम के साक्षी बने थे, वह अब राम मंदिर को लेकर ज्यादा उत्साहित हैं

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5 दिन जेल में रखा, रात में ट्रकों में भरकर जंगलों में छोड़ा, फिर भी पहुंचे अयोध्या

5 दिन जेल में रखा, रात में ट्रकों में भरकर जंगलों में छोड़ा, फिर भी पहुंचे अयोध्या

कोटा. अयोध्या में श्रीराम मंदिर में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर देशभर में उल्लास का माहौल है। वर्ष 1990 और 1992 में जो कार सेवक विकट परिस्थितियों में भी अयोध्या पहुंचे और घटनाक्रम के साक्षी बने थे, वह अब राम मंदिर को लेकर ज्यादा उत्साहित हैं। कोटा से 16 साल की उम्र में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकुट नागर भी 1990 में अयोध्या पहुंचे थे। नागर ने बताया कि संघ की शाखा में जाते थे, वहां अयोध्या जाने की चर्चा हुई तो मैं भी कालातालाब के जत्थे के साथ ट्रेन से सतना पहुंचा, सतना से चित्रकूट जाने के लिए हम बस में सवार होकर चित्रकूट पहुंचे और यहां से उत्तरप्रदेश की सीमा में घुसते ही गिरफ्तार कर लिया गया। यहां से ट्रकों में भरकर बांधा ले गए और यहां एक कॉलेज में बनी खुली जेल में बंद कर दिया और पांच दिन तक यहां रखा। हमारे जत्थे के साथ उमा भारती भी थीं। वे पुलिस को चकमा देकर रात में वेश बदल कर निकल गई। यहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और विजयराजे सिंधिया भी पहुंचे थे। उत्तरप्रदेश पुलिस ने पांचवें दिन रात में बांधा से ट्रकों में भरकर मध्यप्रदेश के जंगलों में छोड़ गए। वहां से हम सतना आ गए और ट्रेन से रवाना हुए कि अचानक पुलिस ने जंगल में ट्रेन रुकवा दी और चैकिंंग शुरू कर दी। कारसेवक ट्रेन से कूद कर जंगलों में भाग गए। मैं जत्थे से बिछुड़ गया। अन्य कारसेवकों के साथ दस दिन में दो सौ किमी पैदल चलकर 8 दिसम्बर को अयोध्या पहुंचा। अयोध्या पहुंचे और लाखों लोगों की संख्या में कार सेवक यहां थे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात थी। 8 दिसम्बर को कारसेवकों को राम मंदिर दर्शन कर तुरंत ट्रेनों से रवाना कर दिया। हमने देखा कि मंदिर की दीवारों में गोलियों के अनगिनत निशान थे।