
Ramzan Special: दोजख की आग से निजात पाने की साधना है रमजान
कोटा . रमजान इस्लामी महीने का 9वां महीना है। इस माह को सबसे पाक माना जाता है। रमजान को तीन हिस्सों में बांटा गया है। हर हिस्से में दस-दस दिन आते हैं। हर दस दिन के हिस्से को अशरा कहते हैं। अरबी में इसका मतलब 10 से है। इस महीने के पहले 10 दिनों में अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों की बारिश करता है।
दूसरे अशरे में रोजेदारों के गुनाह माफ होते हैं। तीसरे दस दिन में रोजेदारों के लिए जन्नत के द्वार खुल जाते हैं। या यूं कह लें कि दोजख की आग से निजात पाने की साधना को समर्पित किया गया है।
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डीसीएम श्रीराम फर्टीलाइजर कंपनी में डीप्टी चीफ इंजीनियर सैय्यद तौसिफ अली बताते हैं, कुरआन के दूसरे पारे की आयत 183 में रोजा रखना हर मुसलमान के लिए जरूरी बताया गया है। रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं बल्कि नफ्स पर काबू पाना है। शारीरिक और मानसिक दोनों के कार्यों को नियंत्रण में रखना है।
पूरी दुनिया की कहानी भूख, प्यास और इंसानी ख्वाहिशों के इर्द-गिर्द धूमती है और रोजा इन पर नियंत्रण रखने की साधना है। रमजान का महीना तमाम इंसानों के दुख-दर्द और भूख प्यास को समझने का माह है, ताकि रोजेदारों में भले-बुरे को समझने की ताकत पैदा हो सके।
मां सैय्यद सलामत अली कहती है, रमजान के लिए 30 दिनों का समय निर्धारित है, लेकिन इसे 6 अतिरिक्त दिनों तक भी किया जा सकता है। यह अनिवार्य नहीं है। यह उनके लिए है जो किसी कारणवश रोजा नहीं रख पाए हों तो वे अगले छह दिनों में पूरा कर लें।
रमजान को सादगी से मनाए जाने की हिदायत है। इसके पीछे यह संदेश है कि इस पवित्र माह के दौरान कोई ऐसा काम न करें जिससे अहंकार या धूमधाम का अहसास होता हो।
मानसिक तनाव दूर, याददाश्त होती तेज
पिता सैय्यद सलामत अली मानते है, रमजान में पांच वक्त की नमाज व तरावीह अदा करने से मानसिक तनाव दूर होता है। साथ ही एकाग्रता बढ़ती है। इसके अलावा बार-बार कुरआन दोहराने से याददाश्त तेज होती है। वहीं, रमजान का क्रम इंसान को समय की पाबंदी सिखाता है।
नमाज के दौरान उठना, बैठना तो कभी सजदा व सलाम करने से कसरत हो जाती है, जो शरीर को चुस्त-दुस्त रखती है। व्यवहार में लचीनापन, सहन शक्ति में इजाफा, आत्मनिर्भरता, आत्मसंतुलन शरीर में कैलारी की मात्रा को नियंत्रण में रखने में भी रमजान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
Published on:
31 May 2018 01:44 pm
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