नमाज के दौरान उठना, बैठना तो कभी सजदा व सलाम करने से कसरत हो जाती है, जो शरीर को चुस्त-दुस्त रखती है। व्यवहार में लचीनापन, सहन शक्ति में इजाफा, आत्मनिर्भरता, आत्मसंतुलन शरीर में कैलारी की मात्रा को नियंत्रण में रखने में भी रमजान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।