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राजस्थान में हो रही लाल-पीले-बैंगनी रंगों के आलू की खेती, हाड़ौती से आई यह दिलचस्प खबर

Colourful Potato Farming In Rajasthan : कोटा। हाड़ौती अंचल में अब लाल, पीले, बैंगनी, सिंदूरी व बादामी रंग के आलू का उत्पादन होगा। कृषि अनुसंधान केंद्र उम्मेदगंज में राष्ट्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के सहयोग से अनुसंधान चल रहा है, जिसमें आलू की करीब 60 किस्म व जीनोटाइप को यहां के वातावरण में लगाकर देखा जा रहा है कि कौनसी किस्म बेहतर उत्पादन देती है।  

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Colourful Potato Farming In Rajasthan

राजस्थान में हो रही लाल-पीले-बैंगनी रंगों के आलू की खेती, हाड़ौती से आई यह दिलचस्प खबर

हाबूलाल शर्मा
Colourful Potato Farming In Rajasthan : कोटा। हाड़ौती अंचल में अब लाल, पीले, बैंगनी, सिंदूरी व बादामी रंग के आलू का उत्पादन होगा। कृषि अनुसंधान केंद्र उम्मेदगंज में राष्ट्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के सहयोग से अनुसंधान चल रहा है, जिसमें आलू की करीब 60 किस्म व जीनोटाइप को यहां के वातावरण में लगाकर देखा जा रहा है कि कौनसी किस्म बेहतर उत्पादन देती है।

साथ ही आलू की भिन्न-भिन्न रंग की किस्म, आकार, उत्पादन एवं गुणवत्ता पर भी अनुसंधान किया जा रहा है। रंगीन आलू की किस्मों को किसानों ने लगाया, अच्छा उत्पादन हुआ और बाजार भाव भी साधारण आलू से ज्यादा मिले। अब आने वाले समय में आलू की बैंगनी, बादामी, सिंदूरी, लाल आदि रंग की किस्में बाजार में देखने को मिलेंगी।

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किसानों को उपलब्ध करवाई रंगीन आलू की किस्म
अखिल भारतीय समन्वित आलू अनुसंधान परियोजना के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. रामराज मीणा ने बताया कि अभी तक केंद्र पर आलू की कुफरी, माणिक, कुफरी नीलकंठ, कुफरी जामुनिया, कुफरी ललित, कुफरी सिंदूरी आदि रंगीन किस्मों पर अनुसंधान किया जा रहा है। इसमें कुछ किस्में किसानों को भी उपलब्ध करवाई गई थी, जिसका परिणाम भी अच्छा रहा। यह सभी किस्में 75 से 100 दिन में पककर तैयार हो जाती हैं। भाव अच्छा मिला... अर्जुनपुरा के किसान देवीशंकर गहलोत और फूदीलाल ने बताया कि उन्होंने आलू की लाल किस्म की बुवाई की। अच्छा उत्पादन हुआ। अब आगे से इसी किस्म के आलू की पैदावार करेंगे।

अनुबंध पर हो रही खेती
किसान जयप्रकाश ने बताया कि किसान चिप्स बनाने वाली बड़ी कंपनियों से अनुबंध पर शुगर फ्री आलू की खेती कर रहे हैं। कंपनियां फसल लगाते ही किसानों से अनुबंध कर लेती हैं, जिसमें भाव व आलू का आकार शामिल होता है। फसल तैयार होते ही कंपनी की ओर से आलू लेने आ जाते हैं। अभी बैंगनी व लाल रंग की किस्म के आलू की फसल बीज बनाने के लिए की थी।

बढ़ाते हैं रोग प्रतिरोधक क्षमता
परियोजना के वैज्ञानिक डॉ. डीएल यादव ने बताया कि रंगीन किस्म के आलू की मांग बड़े शहरों के हाइप्रोफाइल लोगों एवं होटलों में अधिक रहती है। इन किस्मों में एंथोसियानिन, केरोटिनॉइड, विटामिन-सी व एंटीऑक्सीडेंट सामान्य किस्मों की अपेक्षा अधिक पाए जाते हैं। ये सभी गुण शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करते हैं।