
सर्पो का लॉक डाउन खुला तो हुए दुर्लभ प्रजाती के दीदार
हेमंत शर्मा /कोटा. लॉक डाउन में इंसान घरों में कैद है, लेकिन शायद रेप्टीलिया वर्ग के जीवों के लिए गर्मी आते ही लॉक डाउन खुल गया। शहर व कस्बे व जंगलों में रेप्टीलिया वर्ग के जीव गत दिनों से काफी संख्या में देखे जा रहे हैं। इस वर्ग के जीव अक्टूबर ,नवम्बर में सर्दी बढऩे के बाद बिलों में चले जाते हैं और मार्च-अप्रेल में गर्मी की आहट के साथ ही ये बिलों से निकलकर बाहर नजर आने लगते हैं, लेकिन वन्यजीव प्रेमियों लिए सुखद खबर है कि सरीसृप वर्ग के स्टे होम के बाद रावटभाटा में हाल ही में फोरस्टंस केट स्नेक नजर आया है।
वन्यजीव विभाग के सहायक वन संरक्षक अनुराग भटनागर ने बताया कि इसे रावट भाटा में टाउनशिप में हाल ही में देखा गया है। यह सर्प सघन वन क्षेत्रों मंे पाया जाता है। रावतभाटा व आसपास के इलाकों में यह तीसरी बार नजर आया है। सबसे पहले 2014 में अणु कॉलोनी, २०१८ में वन विभाग की भैसरोड रैंज में पाड़ाझर क्षेत्र में व अब हाल ही में टाउन शिप में नजर आया है।
सेवा निवृत्त सहायक वन सरंक्षक डॉ.सतीश शर्मा बताते हैं कि रावतभाटा के अलावा प्रदेश में माउंट आबू, फुलवाड़ी की नाल सेंचुरी में भी इस प्रजाति के सर्प हैं को देखा गया है। आमतौर पर ये सघन वनों में पाए जाते हैं। केरल कर्नाटक,उडि़सा, हिमाचल, डांग, डार्जलिंग से उत्तराखंड के समेत घने जंगलों में ये मिलते हैं। यहां दिखाई देना क्षेत्र के वनों की समृद्धि को दिखाता है।
ऐसे होते हैं
डॉ सतीश के अनुसार इनकी लंबाई २ से 2.31 मीटर के करीब होती है। छिपकली, पक्षी व उनके अंडे,चिडि़या का भक्षण करते हैं। कई बार छोटे सर्प को भी खा जाते हैं। अधिकतर पेड़ों के बीच बनी जगहों में अपना आशियाना बना लेते हैं। इससे पक्षियों का शिकार करने में इन्हें मदद मिलती है। यह कम जहरीले होते हैं। इससे इंसान को इनसे खतरा नहीं है। इनकी आंखे बड़ी व खड़ी पुतली होती है।
बिल्ली की तरह रात में निकलते हैं। इससे इन्हें पोरस्टंस केट स्नेक कहते हैं।इन्हें खतरा होता है तो गर्दन को फुला लेते हैं। विशेष ध्वनि करते हैं व पूछ को विशेष रूप से हिलाकर डराते हैं। त्वचा खुरदरी, पतले, लचीले,हल्की लालिमा या सलेटी रंग लिए त्वचा होती है।
Updated on:
28 Apr 2020 04:29 pm
Published on:
28 Apr 2020 04:25 pm
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