
कोटा. देश अपना 71वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। देश की विकास यात्रा लगातार जारी है लेकिन इसके शिल्पकारों के साथ उन सपूतों का स्मरण भी जरूरी है जिन्होंने राष्ट्ररक्षा में अपने प्राणों की आहूति दी है । ऐसे ही एक सपूत हाड़ौती की माटी के भी है। शहीद हेमराज मीणा (सांगोद कोटा) , पुलवामा हमले में अपनी जान गंवाने वाले सपूत जिनका सपना था कि जब तक जान है मातृभूमि की सेवा करता रहूं। जिस वर्दी को पहन कर कोटा के लाल हेमराज ने मातृभूमि की रक्षा की सौगंध खाई थी, वह उसी को पहने हुए शहीद हो गए। गोलियों और बमों की ताबड़तोड़ बौछार के बावजूद जांबाज ने अपने कदम पीछे खींचना तो दूर लडखड़़ाने तक नहीं दिए।
सीआरपीएफ में चयन के बाद जब भी छुट्टी मिलती, अपने गांव विनोदकलां में दोस्तों के बीच देशभक्ति की ही बात करते। कई बार भावुक हो उठते। कहते, देश की सेवा करते हुए प्राण गए तो जीवन सार्थक होगा। यह बताते-बताते हेमराज के बचपन के साथी पंकज सुमन की आंखें छलक पड़ीं। उन्होंने पत्रिका को बताया, हेमराज कहते थे, मौका मिला तो सीने पर गोली खाऊंगा लेकिन पीछे नहीं हटूंगा।
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शहीद की पत्नी के जज्बे को देख कांप उठी रूह
पुलवामा में हुई घटना के बाद जब शहीद हुए वीर सपूत हेमराज मीना का पार्थिव शहर घर पहुंचा तो उनकी पत्नी बाहर आई और वहां मौजूद लोगों को रोने के लिए मनाते हुए भारत माता की जय बोली। पत्नी ने अपने माथे का सिंदूर हटाने की जगह सिंदूर लगाया। इस घटना ने न केवल हाड़ौती बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया था।
Published on:
24 Jan 2020 08:21 pm
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