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विवाह पंजीयन में आड़े आ रहे 2 राज्यों के नियम, परेशान हो रहे नवदंपती

इन दस्तावेज में जन आधार भी राजस्थान में होने वाली शादी में अनिवार्य है। राजस्थान का वर व वधू हो तो उसका जन आधार मिल जाता है लेकिन मध्यप्रदेश में जन आधार के स्थान पर समग्र आइडी अनिवार्य की हुई है।

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कोटा

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Akshita Deora

Oct 03, 2024

राजस्थान व मध्यप्रदेश राज्यों की सीमा एक दूसरे से लगी होने से इन राज्यों में युवक-युवतियों के विवाह भी खूब होते हैं, लेकिन विवाह पंजीयन में दोनों राज्यों के नियम में जन आधार व समग्र आइडी की विसंगति के चलते नवदंपती को पंजीयन करवाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

रामगंजमंडी शहर में औसतन प्रतिमाह विवाह पंजीयन के ऐसे 12 मामले सामने आते हैं जिनको विवाह पंजीयन के लिए चक्कर काटने की विवशता के साथ पोर्टल पर क्रमांक नंबर डलने का इंतजार करना पड़ता हैं। यह नंबर जब सांख्यिकी विभाग से आता है, तभी पंजीयन प्रमाण पत्र तैयार होने की स्थिति बनती है।

यह है नियम


विवाह पंजीयन जिस शहर में विवाह होता है वहां बनाना पड़ता है। मध्यप्रदेश के युवक का विवाह राजस्थान में रहने वाली लड़की से हुआ तो विवाह पंजीयन के समय जो दस्तावेज संबंधित नगर निगम, पालिका व पंचायत में मांगे जाएंगे, उसमें पासपोर्ट साइज फोटो वर तथा वधू, वर के पासपोर्ट फोटो, बर्थ सर्टिफिकेट अथवा दसवीं कक्षा की मार्कशीट की फोटो प्रति सत्यापित, वर वधू के माता पिता का आधार, आइडी कार्ड, राशनकार्ड की फोटोप्रति, दो गवाहों की पासपोर्ट साइज फोटो, गवाह के आइडी कार्ड, आधार कार्ड की फोटोप्रति, जिस स्थान पर विवाह हुआ है वहां की मूल प्रमाण पत्र की प्रति (जैसे- पंचायती मंदिर, व्यापार मंडल आदि की मूल प्रमाण पत्र की प्रति अथवा वार्ड में शादी होने पर वार्ड पार्षद की रिपोर्ट की प्रति) के साथ विवाह का कार्ड उपलब्ध करवाना होता है।

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इन दस्तावेज में जन आधार भी राजस्थान में होने वाली शादी में अनिवार्य है। राजस्थान का वर व वधू हो तो उसका जन आधार मिल जाता है लेकिन मध्यप्रदेश में जन आधार के स्थान पर समग्र आइडी अनिवार्य की हुई है। इस समग्र आइडी को राजस्थान में नहीं माना जाता। इसके बाद शुरू होता है पंजीयन के लिए चक्कर काटने का सिलसिला।

विवाह पंजीकरण से यह फायदे


यह प्रमाण पत्र पति पत्नी के संबंध को प्रमाणित करता है। पति या पति का पासपोर्ट बनाने के सहायक है। यदि पति किसी दूसरे देश का नागरिक है तब पत्नी को इस देश की नागरिकता दिलाता है। पति की मृत्यु के बाद पत्नी को उसके अधिकार दिलाने में सहायक है। शादी पर किसी तरह का सवालिया निशान उठता है तो मैरिज सर्टिफिकेट शादी का कानूनी सबूत होता है। बैंक में ज्वाइंट अकाउंट खोलने में भी यह काम आ सकता है। इसके अलावा पासपोर्ट के लिए अप्लाई करते समय भी यह सहायक है।