
एसबीबीजे व सहयोगी बैंकों का भारतीय स्टेट बैंक में विलय अन्तरराष्ट्रीय दबाव में किया जा रहा है। इससे कर्मचारियों व ग्राहकों को कोई लाभ नहीं होगा। विलय से बैंक इंडस्ट्रीज पर अतिरिक्त भार पड़ेगा, इसे सहना मुश्किल होगा। ऑल इण्डिया एसबीआई एम्पलॉयज एसोसिएशन के महासचिव जे.पी. झंवर ने शनिवार को यह बात कही।
झालावाड़ रोड स्थित इंजीनियरिंग भवन में पत्रकारों से झंवर ने कहा कि वर्तमान में एसबीबीजे व सहयोगी बैंकों से राज्य सरकार को 1 लाख 70 हजार करोड़ का व्यवसाय हो रहा है। शुद्ध लाभ 850 करोड़ का है।
बैंकों से राज्य सरकार को 15 प्रतिशत सर्विस टैक्स मिलता है। इस हिसाब से करीब 127 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है। यदि विलय होता है तो सरकार को नुकसान होगा। झंवर ने कहा कि ऋण समय पर नहीं चुकाने वालों को सजा मिलनी चाहिए। इसके लिए सरकार को सख्त कानून बनना चाहिए, ताकि बैंकों के विलय होने जैसी स्थिति पैदा नहीं हो।
बैंक रिकवरी में सरकार की तरह से कोई सहयोग नहीं मिल रहा। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा है। उनका कहना है कि यदि एसबीबीजे व सहयोगी बैंकों का विलय हुआ तो उनकी एसोसिएशन विरोध-प्रदर्शन व हड़ताल पर उतरेगी।
खुत्रा सत्र आयोजित
एसबीबीजे व सहयोगी बैंकों की शाखाओं के भारतीय स्टेट बैंक में प्रस्तावित विलय पर झालावाड़ रोड स्थित इंजीनियरिंग भवन में शनिवार को कार्यशाला आयोजित की गई।
खुले सत्र में झंवर ने भारतीय स्टेट बैंक में कर्मचारियों की स्थानांतरण नीति, विभिन्न पदों के लिए देय विशेष भत्ता, पद के अनुरूप दायित्वों, अस्थायी कर्मचारियों की स्थिति, आउटसोर्सिंग, संगठन की स्थिति व पूर्व में विलय हो चुके स्टेट बैंक ऑफ इंदौर व स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र के कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति के बारे में बताया। इससे पहले ऑल राजस्थान एसबीबीजे एम्पलॉयज को-ओर्डिनेशन कमेटी के उपमहासचिव संजीव झा ने कार्यक्रम के मूल उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर वरिष्ठ बैंक कर्मचारी नेता शरणलाल गुप्ता, राजस्थान प्रदेश बैंक एम्पलॉयज यूनियन कोटा इकाई के सचिव पदम पाटौदी, ऑल राजस्थान एसबीबीजे एम्पलॉयज को- आेर्डिनेशन कमेटी के सहायक महासचिव मिर्जा नफीस बैग, ऑल राजस्थान एसबीबीजे एम्पलॉयज एसोसिएशन के सहायक महासचिव भारत भूषण गौतम उपस्थित रहे।
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