देखिए 450 साल से कैसे बुनी जा रहा है कोटा डोरिया की खास साड़ी

Vineet singh

Publish: Sep, 17 2017 02:11:47 (IST) | Updated: Sep, 17 2017 02:18:37 (IST)

Kota, Rajasthan, India
देखिए 450 साल से कैसे बुनी जा रहा है कोटा डोरिया की खास साड़ी

कोटा डोरिया की साड़ियां आपने पहनी तो खूब होगी, लेकिन क्या आपको पता है इन साड़ियों की बुनाई कितने मुश्किल तरीके से की जाती है।

भारतीय परिधानों में खास जगह रखने वाले कोटा के क्लोथ ब्रांड कोटा डोरिया की बुनाई बेहद मुश्किल होती है। जो लोग इसकी बुनाई के बारे में नहीं जानते वही लोग नकली कोटा डोरिया महंगे दामों पर खरीद लाते हैं। क्योंकि जिन्हें इसकी बुनाई की जानकारी होती है वह साड़ी हाथ में लेते ही उसकी बुनाई का पेटर्न देखकर आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि यह हाथ से बनी असली कोटा डोरिया है या मशीन से बनी दोयम दर्जे की नकली कोटा डोरिया। इसलिए कोटा डोरिया महोत्सव में इसकी बुनाई का तरीका भी दिखाया गया।

हाड़ौती उत्सव आयोजन समिति की ओर से दो दिवसीय कोटा डोरिया महोत्सव शुरुआत हई। जिसमें पहले दिन नयापुरा स्थित कलादीर्घा में प्रदर्शनी में कैथून से आए कोटा डोरिया बुनकरों ने पिटलूम पर कोटा डोरिया की बुनाई करके दर्शकों को असली और नकली कोटा डोरिया को पहचानने का तरीका सिखाया। बुनकर रजिया ने कहा, उनका पूरा परिवार इस काम में जुटा हुआ है और वह चाहती हैं कि लोग जानें कि असली कोटा डोरिया कितनी मेहनत और सफाई से तैयार की जाती है। रजिया सिर्फ कोटा डोरिया की साड़ियां ही नहीं लैम्प, गुलदस्ते, बंदरवाल, टेबल के आइटम, फाइल कवर, जूतियां जैसी वस्तुएं भी बनाती हैं। जिनकी यहां प्रदर्शनी लगाई गई।

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प्रेरणादायक है यह नवाचार

प्रदर्शनी का उदघाटन करने आए पुलिस अधीक्षक भौमिया ने कहा कि हस्तकला से सुंदर सामग्रियों का निर्माण नवाचार की प्रेरणा देता है। समिति के महामंत्री पंकज मेहता ने कहा कि हाड़ौती की कला एवं संस्कृति को मंच प्रदान करना समिति का उद्देश्य रहा है। कार्यक्रम में फैशन डिजाइनर पूजा राजवंशी ने कोटा डोरिया की पृष्ठभूमि और परिधानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा, डोरिया सिर्फ साड़ी नहीं है। यह एक हस्तकला है, जिससे हाड़ौती की पहचान विश्वभर में है। साड़ी के अलावा भी इससे कई हुनर वाले आइटम बन सकते हैं।

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छात्राओं ने सीखी पोट्रेट बनाने की नई तकनीक

कोटा। राजकीय महिला पॉलिटेक्निक महाविद्यालय के कमर्शियल आर्ट विभाग में दो दिवसीय पोट्रेट कार्यशाला का आयोजन किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्या नीना स्वरूप ने बताया कि कमर्शियल आर्ट की तीनों वर्षों की छात्राओं के लिए आयोजित कार्यशाला में चण्डीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्ट के व्याख्याता जसप्रीत सिंह ने अलग-अलग माध्यम से पोट्रेट बनाने की नई तकनीक की जानकारी दी। सिंह ने छात्राओं को चारकोल, ऑयल कलर, वाटर कलर, पेंसिल व अन्य माध्यमों से पोट्रेट बनाना सिखाया। कार्यशाला का संचालन कमर्शियल आर्ट की विभागाध्यक्ष सुहास दत्ता ने किया।

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