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माता शीतला की सवारी क्यों है, गर्दभ ! जानिए इसका वैज्ञानिक रहस्य

गर्मी के मौसम में दिनचर्या व खानपान में समुचित बदलाव से ही मनुष्य स्वस्थ रह सकता है।

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कोटा

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Suraksha Rajora

Mar 15, 2020

माता शीतला की सवारी क्यों है, गर्दभ ! जानिए इसका वैज्ञानिक रहस्य

माता शीतला की सवारी क्यों है, गर्दभ ! जानिए इसका वैज्ञानिक रहस्य

कोटा . यह पर्व सन्देश देता है कि गर्मी के मौसम में दिनचर्या व खानपान में समुचित बदलाव से ही मनुष्य स्वस्थ रह सकता है। होली के आठवें दिन मनाए जाने वाला शीतला अष्टमी पर्व चैत्र कृष्ण सप्तमी इस बार 15 मार्च रविवार को मनाई जाएगी । इस दिन रात्रि में माता का जागरण ओर भोजन बनेगा और शीतल अष्टमी का पर्व पूजन ,बास्योड़ा सोमवार 16 मार्च को मनाएगे।

महिलाएं तड़के गीत गाते हुए शीतला माता के मंदिरों में भोग लगाएंगी और पथवारी पूजेंगी। दूसरी तरफ महिलाएं आज से ही रांधा-पुआ की तैयारियों में व्यस्त हो गई हैं। महिलाएं माता के भोग के लिए कांजी बड़ा, मोहनथाल, गुंजिया, पेठे, सकरपारे, पूड़ी, पापड़ी, राबड़ी आदि व्यंजन बनाने में जुटी हैं। शीतला माता के ठंडे पकवानों का भोग लगाने के बाद इस दिन सभी लोग परंपरा के अनुसार ठंडा भोजन करेंगे।

कभी नहीं खाना चाहिए इन 7 लोगों के घर का अन्न, अन्यथा हो जाएंगे तबाह रविवार को रांधा पुआ होने से बाजारों में मटके एवं सराई सहित पूजा सामग्री फुटपाथ पर बिकना शुरू हो गई है। मान्यता के अनुसार शीतला माता के पूजन और ठंडा भोजन करने से माता प्रसन्न होती है और शीतला जनित रोगों का प्रकोप कम होता है।

शीतला माता की कथा प्राचीन समय की बात है। भारत के किसी गांव में एक बुढ़िया माई रहती थी। वह हर शीतलाष्टमी के दिन शीतला माता को ठंडे पकवानों का भोग लगाती थी। भोग लगाने के बाद ही वह प्रसाद ग्रहण करती थी। गांव में और कोई व्यक्ति शीतला माता का पूजन नहीं करता था। अनोखा मंदिर! यहां भगवान के दर्शन से डरते हैं लोग, करते हैं सिर्फ पीठ की पूजा एक दिन गांव में आग लग गई।

काफी देर बाद जब आग शांत हुई तो लोगों ने देखा, सबके घर जल गए लेकिन बुढ़िया माई का घर सुरक्षित है। यह देखकर सब लोग उसके घर गए और पूछने लगे, माई ये चमत्कार कैसे हुआ? सबके घर जल गए लेकिन तुम्हारा घर सुरक्षित कैसे बच गया?बुढ़िया माई बोली, मैं बास्योड़ा के दिन शीतला माता को ठंडे पकवानों का भोग लगाती हूं और उसके बाद ही भोजन ग्रहण करती हूं।

माता के प्रताप से ही मेरा घर सुरक्षित बच गया। गांव के लोग शीतला माता की यह अद्भुत कृपा देखकर चकित रह गए। बुढ़िया माई ने उन्हें बताया कि हर साल शीतलाष्टमी के दिन मां शीतला का विधिवत पूजन करना चाहिए, उन्हें ठंडे पकवानों का भोग लगाना चाहिए और पूजन के बाद प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।

पूरी बात सुनकर लोगों ने भी निश्चय किया कि वे हर शीतलाष्टमी पर मां शीतला का पूजन करेंगे, उन्हें ठंडे पकवानों का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करेंगे। कथा का संदेश शीतला माई ठंडे पकवानों के जरिए सद्बुद्धि, स्वास्थ्य, सजगता, स्वच्छता और पर्यावरण का संदेश देने वाली देवी हैं। चूंकि भारत की जलवायु और खासतौर से राजस्थान की जलवायु गर्म है। गर्मी कई रोग पैदा करती है।

वहीं शीतला माई शीतलता की देवी हैं। माता के हाथ में झाड़ू भी है जो स्वच्छता और सफाई का संदेश देती है। कथा के अनुसार शीतला माई का यह संदेश है कि गर्मी के मौसम में दिनचर्या व खानपान में समुचित बदलाव से ही मनुष्य स्वस्थ रह सकता है। शीतला माता गर्दभ की सवारी करती हैं। चूंकि यह बहुत धैर्यशाली जानवर है, इसके जरिए देवी का यह संदेश है कि मनुष्य को अपना तन-मन शीतल रखते हुए धैर्य के साथ निरंतर परिश्रम करना चाहिए। इसी से सफलता प्राप्त होती है तथा जीवन सुखमय होता है।