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सांगोद गौण मंडी में सन्नाटा, नहीं हो रही खरीद

सांगोद. फसल कटाई के साथ ही जहां जिले की अन्य मंडियों में जिसों की बम्पर आवक हो रही है लेकिन यहां गौण कृषि उपजमंडी में सन्नाटा पसरा हुआ है।

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कोटा

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Anil Sharma

Feb 28, 2018

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सांगोद. फसल कटाई के साथ ही जहां जिले की अन्य मंडियों में जिसों की बम्पर आवक हो रही है लेकिन यहां गौण कृषि उपजमंडी में सन्नाटा पसरा हुआ है। प्रशासन की अनदेखी के कारण यहां मंडी का संचालन नहीं हो पा रहा है।
इसका खामियाजा किसानों के साथ यहां के दुकानदार व व्यापारियों को भी उठाना पड़ रहा है। यह हालत तो तब है जब यहां मंडी की व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर कृषि विपणन बोर्ड ने करोड़ों रुपए खर्च किए हैं। अभी तक मंडी में जिंस खरीद का श्रीगणेश नहीं हुआ है। बाजारों में अवैध तरीके से जिंस की खरीद कर रहे व्यापारी मनमाने दाम पर किसानों की उपज खरीदकर मौज मना रहे हैं।
जानकारी के अनुसार क्षेत्र में रबी व खरीफ के सीजन में हर साल दो लाख हैक्टेयर से अधिक की बुवाई होती है लेकिन किसानों को उपज बेचने के लिए उचित मंच नहीं मिल पा रहा है। या तो किसान उपज बेचने के लिए कोटा व अन्य मंडियों में जाने को मजबूर हैं या स्थानीय व्यापारियों को कम दाम पर जिन्स बेचने को मजबूर हैं। कोटा व अन्य मंडियों में किसानों को नकद भुगतान के साथ व्यापारियों से अन्य सुविधाएं भी मिलती है। किसान जिंस बेचने के बाद उपज से मिलने वाली राशि से घर परिवार की जरूरत की चीजें भी वहीं से खरीद लाते हैं। इससे यहां का बाजार भी प्रभावित हो रहा है।

हर तरफ उदासीनता
मंडी संचालन में जनप्रतिनिधि, व्यापारी एवं प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता किसानों को भारी पड़ रही है। मंडी के व्यापारी यहां खरीद- फरोख्त शुरू नहीं कर बाजारों में जिंसों की खरीद कर चांदी कूट रहे हैं।
इन पर न तो प्रशासन कार्रवाई कर रहा और न मंडी समिति। किसानों की सहुलियत की बातें करने वाले जनप्रतिनिधि भी मंडी संचालन को लेकर कोई प्रयास नहीं कर रहे।

डेढ़ दर्जन व्यापारियों के पास हैं लाइसेंस
यहां गौण मंडी में यूं तो करीब डेढ़ दर्जन स्थानीय व्यापारियों के लाइसेंस हैं लेकिन व्यापारी यहां खरीद फरोक्त नहीं कर सिर्फ यहां बने गौदामों का उपयोग करते है। मंडी प्रशासन इनसे किराया तो समय पर वसूलता है लेकिन मंडी खरीद के लिए इन्हें पाबंद नहीं करता। ऐसे में करोड़ों रुपए खर्च कर जुटाई गई सुविधाएं सिर्फ राजनीतिक व अन्य समारोह आयोजनों तक सिमटकर रह गया है।