129वें राष्ट्रीय मेला दशहरा के तहत नगर निगम कोटा उत्तर और दक्षिण की ओर से शहर में सात स्थानों पर आयोजित की जा रही रामलीलाओं में गुरुवार की रात कलाकारों ने धनुष यज्ञ, रावण बाणासुर संवाद, परशुराम लक्ष्मण संवाद, सीता स्वयंवर के प्रसंगों का मंचन किया।
दशहरा मैदान स्थित श्रीराम रंगमंच पर राघवेंद्र कला संस्थान की ओर से रामलीला का मंचन किया गया। चौथे दिन राजा जनक के दरबार में सीता स्वयंवर का ²श्य दिखाया। भगवान राम शिव धनुष को तोड़ते हैं। शिव धनुष के टूटते ही जहां जयश्रीराम के उद्घोष से पांडाल गूंज उठा।
बाद में परशुराम की गर्जना से रामलीला मैदान में सन्नाटा पसर गया। परशुराम-लक्ष्मण संवाद काफी सराहे गए। लक्ष्मण और परशुराम के संवाद को लोगों ने खूब सराहा।इससे पहले मेला समिति सदस्य चेतना माथुर, सहवरित पार्षद राजेश पाराशर, अयोध्या बाई गुर्जर, सजाउद्दीन अंसारी, सुरेंद्र मेघवाल ने राम, लक्ष्मण और मुनि विश्वामित्र के प्रतिरूपों की आरती की।
यहां भी हुई रामलीलाएं
देवनारायण योजना में स्थानीय लोगों की ओर से रामलीला मंचित की जा रही है। वहीं स्टेशन क्षेत्र में शिव मंडल विकास समिति, शिव मंदिर रेलवे कॉलोनी में, केशवपुरा में मनोरथ कला संस्थान की ओर से श्रीराम जानकी मंदिर में, नदीपार क्षेत्र में श्रीराम कला संस्थान की ओर से बीड के बालाजी मंदिर में, आरकेपुरम में आदर्श नवयुवक रामलीला समिति की ओर से रामलीला मैदान पार्क में, ग्राम दसलाना में दसलाना रामलीला आयोजन समिति की ओर से मंचन किया गया।
श्रीराम की बाल लीलाओं के प्रसंग पर मंत्रमुग्ध हुए श्रोता
राष्ट्रीय दशहरा मेला में दोनों निगमों की ओर से शहर में दस स्थानों पर आयोजित की जा रही। श्रीराम कथा में गुरुवार को व्यासपीठ से रामकथा में श्रीराम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न की बाल लीलाओं का वर्णन सुनाया गया। वहीं राक्षसों के वध के प्रसंगों ने भी रोमांचित कर दिया। पंडित मनोज शर्मा ने छावनी में कथा में कहा कि श्रीरामकथा मनमोहक, भवभयतारक व मर्यादापूर्वक मानव जीवन जीने का प्रधान साधन है। श्रीराम बाल्यावस्था से ही बड़े ही तेजस्वी थे। भगवान राम ने यज्ञोपवीत संस्कार के बाद गुरु आश्रम में अल्प समय में ही सभी कलाओं का ज्ञान प्राप्त कर लिया।
बालिका संत राधिका किशोरी ने कहा कि श्रीराम उदार, भावुक व करुणामयी हैं। श्रीराम ने महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या का उद्धार कर पति-पत्नी के बीच प्रेम की परिपूर्णता को स्थापित कर दिया। श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम है। चौपडा फार्म पर कथा करते हुए पंडित महेश शर्मा ने कहा कि बड़े पुण्य कर्मों से मानव जीवन प्राप्त हुआ है। इसका अधिक से अधिक अच्छे कार्यों में सदुपयोग करना चाहिए। पंडित रामावतार शर्मा शास्त्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम जैसा लोक व्यवहार और ज्ञाता इस धरती पर आज तक कोई नहीं हुआ।
राम के लिए राज्य छोड़कर जंगल जाने का वरदान मांगने वाली कैकेयी के प्रति राम के मन में कभी कोई दुर्भाव नहीं रहा। पंडित गौरव कृष्ण तिवारी ने कहा कि रामायण के अनुश्रवण मात्र से परमतत्व की प्राप्ति होती है। माता कौशल्या के अनुरोध पर प्रभु ने बालरूप धारण कर उन्हें वात्सल्य सुख प्रदान किया। उन्होंने ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनियां… गाकर भक्तों को प्रभु की बाल लीलाओं पर मंत्र मुग्ध कर दिया। पंडित कृष्ण कांत पाराशर ने कहा कि श्रीरामकथा सामाजिक व्यवहार, परमार्थिक कर्तव्यों का बोध कराकर व्यक्ति को ²ढ़ बनाती है।
अन्याय, अत्याचार, अनैतिकता से संघर्ष का सामथ्र्य केवल राम कथा ही प्रदान कर सकती है। इसके अलावा रामानंद आश्रम में पंडित आचार्य जगदीश वेदी, जगन्नाथपुरा में पंडित अनिल दीक्षित, रणबंका चौराहा यूआइटी ग्राउंड पर पंडित ओमप्रकाश पांडेय ने व्यास पीठ से श्रीराम कथा कर विभिन्न प्रसंगों के वृतान्तों का वर्णन किया।