
कोल्ड अटैक से शरीर की जलने लगी त्वचा, होने लगा कालापन
कोटा शहर में कोल्ड अटैक शुरू हो गया है। सबसे ज्यादा असर कामकाजी महिला, पुरुष व किसानों पर पड़ रहा है। वे ज्यादा चपेट में आ रहे हैं। इसके चलते लोग अब त्वचा रोग विशेषज्ञों के पास पहुंच रहे हैं। सरकारी व निजी अस्पतालों की बात करें तो ऐसे मरीजों की संख्या में एकाएक 10 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। दरअसल, सर्दियों में खासतौर पर तापमान के ज्यादा कम होने पर त्वचा में सूजन की समस्या देखी जाती है। मेडिकली इसे चिलब्लेंस बीमारी कहते हैं, जो छोटे बच्चों के अलावा विशेषकर अधिक उम्र के व्यक्तियों को होती है। इसमें शरीर के ऐसे अंग जो पूरी तरह से ढके नहीं होते और बार-बार कम तापमान के ज्यादा संपर्क में आते हैं, उनमें दिक्कत होने लगती है। जैसे पैर, एड़ी, हाथों की अंगुलियां, नाक और कान खासकर प्रभावित होते हैं।
लक्षण
विशेषकर हाथ व पैर पर दर्द, लाल व काले निशान, त्वचा पर फफोले पडना या अल्सर की शिकायत भी हो सकती है। इसके अलावा स्किन पर सूजन व जलन के साथ त्वचा के रंग में बदलाव होकर प्रभावित हिस्से का काला पड़ना लक्षण है।
कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर के तापमान में अचानक बदलाव से ऐसा होता है। हाथ-पैर का तापमान घटने पर त्वचा के नीचे मौजूद नसें जब बार-बार ठंडे तापमान के संपर्क में आती है तो सिकुडऩे लगती हैं, जिनमें रक्त संचार बाधित हो जाता है।
इलाज
ठंडे वातावरण से दूरी बनने पर 5-6 घंटे बाद दिक्कत सामान्य हो जाती है, लेकिन एक-दो हफ्ते तक परेशानी बनी रहे तो संक्रमण का कारण बन सकती है। मरीज को प्रभावित हिस्से पर क्रीम लगाने और ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने की दवाएं देकर बंद रक्त नलिकाओं को खोला जाता है।
बचाव
बाजार में वाटरप्रूफ ग्लब्स से निजात मिल सकती है।
सर्दी से बचने का जतन करें।
ज्यादातर समय ठंडे पानी का उपयोग नहीं करें, घरों पर गुनगुने गर्म पानी का उपयोग करें।
हाथ-पैरों में सरसों के तेल की मालिश करें।
स्कीन जले तो चिकित्सक की दी ट्यूब व लोशन से मालिश करें।
इनका यह कहना
कोल्ड अटैक से त्वचा जलने वाले मरीज आने लगे हैं। इनमें ज्यादातर घरों पर कामकाजी महिलाएं, धोबी, किसान, बाहर वाहनों पर निकलने वाले युवा व चालक इनके शिकार हो रहे हैं। ये लोग ज्यादा समय ठंडे पानी व हवा में रहते हैं। इनमें हाथ-पैरों में सूजन, कालापन होना, कान का जलना, आंख में सूजन के शिकार हो रहे हैं। ओपीडी में इनकी संख्या बढ़ी है।
डॉ. आशा न्याती, प्रोफेसर, स्कीन डिपार्टमेंट, मेडिकल कॉलेज कोटा
Published on:
04 Jan 2024 01:16 pm
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