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पोर्न साइटों पर सरकार ने लगाया प्रतिबंध तो अब यहां खुलेआम हो रही ‘गंदी बातें’

ताक पर कानून : पोर्न साइटों पर सरकार ने लगाया प्रतिबंध तो सोशल मीडिया परोसने लगा अश्लील कंटेंट, आईटी एक्ट की उड़ाई धज्जियां, बच्चों की मौजूदगी से बढ़ी मुश्किल

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कोटा

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Rajesh Tripathi

Feb 19, 2019

कोटा. सरकार ने पोर्न साइटों की लगाम कसी तो पोर्न इंडस्ट्रीज ने सोशल मीडिया पर ही अश्लील कंटेंट उड़ेल दिया। एक सोशल मीडिया की वॉच वीडियो सर्विस एकाउंट होल्डर्स को धड़ल्ले से अश्लील वीडियो परोस रही है। चिंता का बड़ा सबब यह है कि पोर्न साइटों तक तो हर किसी की पहुंच आसान नहीं थी, लेकिन सोशल मीडिया के इस सबसे बड़े प्लेटफॉर्म पर बच्चों एवं अव्यस्कों की खासी मौजूदगी बनी हुई है, जो समाज के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है।
27 सितम्बर 2018 के दिन दुष्कर्म के एक मामले की जिरह के दौरान जब अभियुक्त ने कहा कि उसने पोर्न वीडियो देखने के बाद पीडि़ता से दुष्कर्म किया तो उत्तराखंड हाईकोर्ट के जज भौचक्के रह गए। उन्होंने तत्काल दूरसंचार मंत्रालय को 857 पोर्न साइटें ब्लॉक करने का आदेश जारी कर दिया। मंत्रालय के आदेश पर दूरसंचार विभाग जब पड़ताल में जुटा तो 30 पोर्टल्स पर पॉर्नोग्राफिक कंटेंट नहीं मिला। इसके बाद महकमे ने इंटरनेट सर्विस लाइसेंस धारकों को 827 पोर्न साइटों को तत्काल बंद करने के आदेश जारी कर दिए।

सोशल मीडिया पर उड़ेला कंटेंट
राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. सीपी गुप्ता बताते हैं कि इसी बीच एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने वैश्विक स्तर पर अपनी वॉच वीडियो सर्विस लांच की। इसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोगकर्ता अपने एकाउंट पर जो वीडियो अपलोड करते हैं, उन्हें इस सर्विस के जरिए टॉप ट्रेडिंग और टॉप सर्चिंग आदि कैटेगरी के मुताबिक दिखाने लगता है। शिकायत के बिना कंटेंट पर प्रतिबंध नहीं लगाने या छंटनी न करने की कमजोरी का फायदा उठा पोर्न साइट प्रोवाडर्स ने इस पर फर्जी एकाउंट्स बनाए और फिर अश्लील सामग्री की छोटी-छोटी क्लीपिंग्स बनाकर सोशल मीडिया के इस सबसे बड़े प्लेटफॉर्म पर उड़ेल दी। नतीजन अश्लील सामग्री बच्चों और अव्यस्कों की पहुंच में आसानी से आने लगी।

शिकायत पर ही कार्रवाई
प्रो. गुप्ता बताते हैं कि इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने खासे दबाव के बाद हिंसात्मक और बदले की भावना से अपलोड करने वाले कंटेंट पर तो प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन बाकी किसी भी सामग्री पर तब तक रोक नहीं लगाई जा सकती, जब तक कोई उपयोगकर्ता उसकी शिकायत नहीं करे। शिकायत के बाद टीम उसकी जांच करती है और सही पाए जाने पर उस कंटेंट को साइट से हटा देती है। लेकिन, इस प्रक्रिया में लगने वाले समय का फायदा उठा तमाम फर्जी एकाउंट्स के जरिए अश्लील सामग्री यहां परोसी जा रही है।

कानूनों का खुला उल्लंघन
अधिवक्ता रोहित सिंह राजावत कहते हैं कि सोशल मीडिया पर अश्लील कंटेंट मुहैया करा रहा सोशल मीडिया भारतीय कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है। इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 के अनुच्छेद 79 (3) और अनुच्छेद 67 के तहत अनैतिक और अश्लील सामग्री प्रकाशित-ट्रांसमिट करना दंडनीय अपराध है। इसका उल्लंघन करने पर पांच साल की सजा और तीन लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है।

पहले भी कदम पीछे खींचे
31 जुलाई 2015 को भी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लगभग 850 पोर्न वेबसाइटों को ब्लॉक किया था, लेकिन जब टेलीकॉम कंपनियों ने इन वेबसाइटों के बैन होने से रेवेन्यू के नुकसान की शिकायत की तो छठे दिन ही कदम पीछे खींचते हुए 700 साइट्स से प्रतिबंध हटा लिया था। कंपनियों का दावा था कि भारत में 70 फीसदी तक इंटरनेट ट्रैफिक पॉर्न वेबसाइट्स के जरिए ही आता है। हालांकि सरकार उस समय भी डेढ़ सौ से ज्यादा ऐसी साइट्स से प्रतिबंध हटाने को राजी नहीं हुई थी, जिन पर चाइल्ड और ग्रास पोर्न परोसा जा रहा था