रामगंजमंडी. रामगंजमंडी की धनिया मंडी में वर्ष 20 में धनिया की जितनी आवक व्यापारियों ने देखी थी, वैसा नजारा वर्ष 21 में धनिया के पीक सीजन में दिखाई नहीं देंगे। इसका सबसे बड़ा कारण हाड़ौती सम्भाग में धनिया की बुवाई का आंकड़े में कमी आना है। गत वर्ष 72 हजार 532 हैक्टेयर में धनिया की बुवाई हुई थी, जो इस वर्ष घटकर 51 हजार 189 हैक्टेयर में रह गई है। धनिया का रकबा घटने का सबसे प्रमुख कारण किसानों की मानसिकता रहा है। जिन्होंने सबसे नाजुक समझे जाने वाली धनिया की फसल पर ब्लाइंड दांव नहीं खेला। पानी की कमी को देखकर चना की फसल उन्हें ज्यादा रास आई। कोटा सम्भाग में सामान्यत: चना की फसल के मुकाबले में कोटा, बारां, झालावाड़ के किसान धनिया की फसल को ज्यादा उपयोगी मानते आए हैं, लेकिन बीते दो सालों में यह भ्रम टूटा है। धनिया के मुकाबले में चना की फसल उन्हें रास आई है। बीते दो सालों में चना के रकबे में बढ़ोतरी इसका मूल कारण है। वर्ष 18 में 1 लाख 33 हजार के मुकाबले में वर्ष 19 में यह आंकड़ा 1 लाख 95 हजार हैक्टेयर पहुंचा तो वर्ष 20 में चना की बुवाई का औसत 2 लाख 37 हजार हैक्टेयर में पहुंच गया, जो बीते 10 सालों में नहींं पहुंचा। एक मायने में यह कहा जाए कि नहरी तंत्र से जुड़े हाड़ौती के बूंदी, बारां तक में चना का रकबा निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा बोया गया है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। गेहूं के बाद बुवाई आंकड़े में चना का रकबा आ रहा है। कोटा जिले में चना 55900 हैक्टेयर, बूंदी जिले में 42 हजार 49 हैक्टेयर, बारां जिले में 69 हजार 281 हैक्टेयर, झालावाड़ जिले में 70 हजार 85 हैक्टेयर में चना की बुवाई हुई है। सर्वाधिक बुवाई गेहूं की इस बार भी कायम है। 4 लाख 71 हजार 648 हैक्टेयर में इसे बोया गया है। सरसों का रकबा 1 लाख 94 हजार 731 हैक्टेयर रहा है तो लहसुन की बुवाई 1 लाख 75 हजार 710 हैक्टेयर में हुई है।