चने के प्रति बढ़ा रुझान, धनिया का रकबा घटा

21 हजार 343 हैक्टेयर में घटा धनिया का रकबा

 

By: shailendra tiwari

Published: 29 Dec 2020, 09:53 PM IST

रामगंजमंडी. रामगंजमंडी की धनिया मंडी में वर्ष 20 में धनिया की जितनी आवक व्यापारियों ने देखी थी, वैसा नजारा वर्ष 21 में धनिया के पीक सीजन में दिखाई नहीं देंगे। इसका सबसे बड़ा कारण हाड़ौती सम्भाग में धनिया की बुवाई का आंकड़े में कमी आना है। गत वर्ष 72 हजार 532 हैक्टेयर में धनिया की बुवाई हुई थी, जो इस वर्ष घटकर 51 हजार 189 हैक्टेयर में रह गई है। धनिया का रकबा घटने का सबसे प्रमुख कारण किसानों की मानसिकता रहा है। जिन्होंने सबसे नाजुक समझे जाने वाली धनिया की फसल पर ब्लाइंड दांव नहीं खेला। पानी की कमी को देखकर चना की फसल उन्हें ज्यादा रास आई। कोटा सम्भाग में सामान्यत: चना की फसल के मुकाबले में कोटा, बारां, झालावाड़ के किसान धनिया की फसल को ज्यादा उपयोगी मानते आए हैं, लेकिन बीते दो सालों में यह भ्रम टूटा है। धनिया के मुकाबले में चना की फसल उन्हें रास आई है। बीते दो सालों में चना के रकबे में बढ़ोतरी इसका मूल कारण है। वर्ष 18 में 1 लाख 33 हजार के मुकाबले में वर्ष 19 में यह आंकड़ा 1 लाख 95 हजार हैक्टेयर पहुंचा तो वर्ष 20 में चना की बुवाई का औसत 2 लाख 37 हजार हैक्टेयर में पहुंच गया, जो बीते 10 सालों में नहींं पहुंचा। एक मायने में यह कहा जाए कि नहरी तंत्र से जुड़े हाड़ौती के बूंदी, बारां तक में चना का रकबा निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा बोया गया है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। गेहूं के बाद बुवाई आंकड़े में चना का रकबा आ रहा है। कोटा जिले में चना 55900 हैक्टेयर, बूंदी जिले में 42 हजार 49 हैक्टेयर, बारां जिले में 69 हजार 281 हैक्टेयर, झालावाड़ जिले में 70 हजार 85 हैक्टेयर में चना की बुवाई हुई है। सर्वाधिक बुवाई गेहूं की इस बार भी कायम है। 4 लाख 71 हजार 648 हैक्टेयर में इसे बोया गया है। सरसों का रकबा 1 लाख 94 हजार 731 हैक्टेयर रहा है तो लहसुन की बुवाई 1 लाख 75 हजार 710 हैक्टेयर में हुई है।

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हाड़ौती में धनिया की सर्वाधिक बुवाई झालावाड़ जिले में
झालावाड़ जिले में उपजाऊ बलाई मिट्टी में धनिये के बीज सबसे नरम होने से आसानी से उग जाते हैं। इस कारण यहां के किसानों का रुझान धनिया के प्रति हर वर्ष देखने को मिलता है, लेकिन बीते दो सालों में सबसे ज्यादा 23 हजार हैक्टेयर में धनिया यहां किसानों ने नहीं बोया। वर्ष 18-19 के मुकाबले में इसमें सात हजार हैक्टेयर बुवाई में कमी आई है। झालावाड़ जिले में वर्ष 18 में 58 हजार 830 हैक्टेयर के मुकाबले में वर्ष 19 में 51 हजार 950 हैक्टेयर में बुवाई हुई थी, लेकिन हाड़ौती सम्भाग में सबसे ज्यादा धनिया की पैदावार देने वाले झालावाड़ के किसानों को रुझान पूरी तरह से पलटी मार चुका है। वर्ष 2020 में यहां 35 हजार 625 हैक्टेयर में धनिया की बुवाई हुई है। कोटा जिले में वर्ष 18 में 19 हजार 450 हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। इसके मुकाबले में वर्ष 19 में 8 हजार 400 हैक्टेयर में धनिया कम बोया गया था। वर्ष 19- में 11 हजार 75 हैक्टेयर में धनिया की बुवाई हुई थी, जो वर्ष 20 में 5964 हैक्टेयर पर पहुंच गई।


सबसे कम बूंदी जिले में
बूंदी जिले में सबसे कम धनिया बोया जाता हैं। वर्ष 18 में यहां 1435 हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। वर्ष 19 में 294 हैक्टेयर में धनिया की बुवाई हुई। वर्ष 2020 में यह आंकड़ा 890 हैक्टेयर पर सिमट गया। बारां जिले में गत वर्ष के मुकाबले में धनिया की बुवाई में करीब 513 हैक्टेयर में कमी आई है। करीब एक हजार बारां में वर्ष 18- में 8250 हैक्टेयर के मुकाबले में वर्ष 19 में 9213 हैक्टेयर में धनिया की बुवाई हुई थी, जो वर्ष 20 में घटकर 8710 हैक्टेयर रह गई।


धनिया बुवाई के सात वर्ष के आंकड़े
वर्ष 12-13 156024 हैक्टयर।
वर्ष 13-14 178210 हैक्टेयर।
वर्ष 14-15 242870 हैक्टेयर।
वर्ष 15-16 193759 हैक्टेयर
वर्ष 16-17 126775 हैक्टेयर।
वर्ष 17-18 97738 हैक्टेयर
वर्ष 18-19 87965 हैक्टेयर
वर्ष 19-20 72532 हैक्टेयर। (20 दिसंबर तक)
वर्ष 2020-21 51189 हैक्टेयर। (10 दिसम्बर तक)

shailendra tiwari Desk
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