हिम्मत नहीं हारो तो मिल ही जाती है सफलता ऐसा ही कुछ कर दिखाया कोटा की बेटी हर्षिता ने…ऐसे बहुत से स्टूडेंट्स हैं, जो मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में असफल होकर अपना रास्ता बदल लेते है लेकिन कोटा की इस बेटी ने ऐसा नहीं किया बल्कि तीसरी बार एम्स परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत कर सफलता का परचम लहराया है ।
सफलता का मंत्र: डाउट को नजरअंदाज नहीं करती हर्षिता ने बताया कि परीक्षा की तैयारी करने के लिए उसे ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ा। टेक्सट बुक्स से पढ़ाई की और उनका ज्यादा से ज्यादा रिवीजन किया। जैसा गाइड किया, उसे फ ॉलो करती गई। रेगुलर टेस्ट देने से परफॉर्मेन्स में सुधार आता चला गया।
रेगुलर क्लासरूम व सेल्फ स्टडी को मिलाकर करीब 10 से 12 घंटे पढ़ाई करती थी। कोई भी चैप्टर पढ़ती थी तो उसका समय पर रिवीजन करती थी। डाउट होने पर तुरंत फैकल्टी से पूछकर उसे क्लीयर करती थी, क्योंकि किसी भी डाउट को नजरअंदाज कर आप आगे नहीं बढ़ सकते। वो डाउट आगे जाकर आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है और उसका असर आपके रिजल्ट पर होता है। हर्षिता ने सफलता को लेकर और क्या कुछ खास कहा देखिये वीडियो….