
कोटा. गुरुवार का दिन प्रदेश वासियों और खास तौर वन्यजीव प्रेमियों के लिए बेहद दुखद खबर लेकर आया। मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में एमटी 3 टाइगर की मौत हो गई। ये टाइगर कई दिनों से बीमार बताया जा रहा था। चिकित्सक रणथम्बौर अभ्यारण्य से मुकंदरा पहुंचते उससे पहले ही एमटी 3 की मौत हो गई।
एमटी 3 की मौत के का दुख इस बात से भी बड़ जाता है क्योंकि इस टाइगर के मुकुंदरा आने की घटना ने पूरे दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। आमतौर पर बाघों को ट्रेकूलाइज करके दूसरी जगहों पर शिफ्ट किया जाता है लेकिन एमटी 3 ऐसा बाघ था जो 150 किमी से ज्यादा का सफर तय कर मुकंदरा में पहुंचा था। लेकिन रणथम्भौर से मुकंदरा आने की कहानी और भी ज्यादा दिलचस्प है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि इंसानो की तरह वन्यजीवों में भी आपस में प्रेम होता है रणथम्भौर और मुकुंदरा टाइगर रिजर्व से जुड़े वन अधिकारी बताते हैं कि एमटी 3 एमटी 2 बाघिन की तलाश में रणथम्बौर से चलकर मुकुंदरा पहुंचा था। दरअसल ये दोनों बाघ-बाघिन एमटी-2 और एमटी-3 रणथंभौर में टी-106 और टी-98 के नाम से जाने जाते थे. दोनों एक साथ रहते थे। दोनों के बीच केमिस्ट्री भी अच्छी थी ।
जब मुकुंदरा रिजर्व में बाघों के पुनर्वास को लेकर पहले टाइगर टी 98 को रणथम्भोर से शिफ्ट किया गया तो उसका जोड़ा बनाने के लिए बाघिन टी-106 को भी मुकंदरा लाया गया। और ऐसा करने से इन दोनों की जोड़ी बिछड़ गई। उसके बाद से एमटी 3 बाघ अचानक रण रणथंम्भौर से गायब हो गया और अपनी बाघिन की तलाश करता हुआ मुकंदरा टाइगर रिजर्व पहुंच गया। कई बार बाघिन एमटी 2 को लेकर दोनों बाघ एमटी 1 और एमटी 3 में संघर्ष की खबरें भी सामने आई...एमटी 3 के लिए एक अन्य बाघिन एमटी 4 को भी रणथम्बौर से मुकंदरा लाया गया लेकिन आखिरकार एमटी 3 हम सभी से हमेशा के लिए बिछड़ गया। हाल ही में एम टी 2 बाघिन ने 2 शावकों का जन्म दिया है लेकिन जंगल की खुशियों पर ग्रहण लग गया। रिजर्व में 6 की जगह 5 सदस्य बचे हैं। 17 साल पहले एमटी 3 की तरह ही टाइगर ब्रोकन टेल भी रणथम्बौर से चलकर दरा अभयारण्य पहुंचा था लेकिन राजधानी एक्सप्रेस से टकरान से उसकी मौत हो गई थी।
Published on:
24 Jul 2020 05:20 pm
बड़ी खबरें
View Allकोटा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
