कोरोना की दूसरी लहर के स्ट्रेन में बदलाव आया है। इस कारण बाइलेट्रेल न्यूमोनिया तीव्रता से और जल्दी हुआ। सेचुरेशन में भी गिरावट रही। इससे मरीजों में गंभीरता ज्यादा रही और अधिकतर मरीज हाईफ्लो ऑक्सीजन व एनआईवी पर रहे। इससे ऑक्सीजन की खपत ज्यादा बढ़ी। इस वायरस का प्रभाव युवाओं में ज्यादा देखने को मिला।
डॉ. विजय सरदाना, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज