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मंडी में बढऩे लगी धनिए की आवक

यार्ड से बाहर तक ढेर, सीजन में पहली बार 25 हजार बोरी का रिकॉड, भावों में टूटन से खरीद के प्रति व्यापारी उत्साहित

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Shailendra Tiwari

Feb 26, 2017

रामगंजमंडी. यहां कृषि उपज मंडी में धनिया की आवक का ग्राफ अब प्रतिदिन बढ़ रहा है लेकिन दिसावर में पूछपरख कमजोर होने से भाव रंगत पर नहीं आए हैं। गत वर्ष के मुकाबले इस सीजन में भाव में 15 से 17 रुपए प्रति किलो की गिरावट का रुख दिखाई दे रहा है। गुजरात की मंडियों में धनिया की आवक शुरू हो चुकी है लेकिन फिलहाल व्यापारी वहां के धनिए के प्रति ज्यादा उत्सुकता नहीं दिखा रहे।

शनिवार को यहां करीब 25 हजार बोरी धनिए की आवक हुई नीलामी यार्ड स पहली बार इस सीजन मेें धनिया की ढेरियां बाहर निकली। यार्ड के अन्य ब्लाक में सड़क पर धनिया की ढेरियां लगी थी। शाम तक आए धनिए की नीलामी हो चुकी थी। धनिया अभी ज्यादातर गीला आ रहा है।

हांलाकि सूखा माल भी बिकने पहुंचा है। गीले व हल्के बादामी धनिए के भावों में दो सौ रुपए क्विंटल की मंदी शनिवार को बंद बाजार की तुलना में बनी तो बढिय़ा किस्म का धनिया 7500 से 9000 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक गया।

व्यापारियों का कहना है कि यहां धनिए की खरीद के प्रति व्यापारियो का मानस अभी बना हुआ है। गत वर्ष यहां आवक से पहले गुजरात की गोडल मंडी में धनिए की आवक होने और दोनों मंडियों में भावों में पन्द्रह रुपए किलो के अंतर ने व्यापारियो को गुजरात की तरफ मोड़ दिया था।

दिसावर के व्यापारियों ने गत वर्ष गुजरात मंडी से खूब धनिया खरीदा। इस बार गुजरात व रामगंजमंडी की मंडी में धनिया के भावों में ज्यादा अंतर नहीं होने से गुजरात के धनिए के प्रति व्यापारियों का रुझान नहीं है। इसका कारण रामगंजमंडी व हाड़ोती संभाग से आने वाले धनिया की गुणवत्ता अच्छी होना व भाव समान होना है।

व्यापारियों ने गत वर्ष मंडी में जिन दरों पर धनिया की खरीद की थी, उनमें ज्यादा रंगत नहीं आने के कारण धनिया व्यापार से जुड़े लोगों को मुनाफा नहीं होने की मार का सामना करना पड़ा था। इस सीजन की शुरुआत में धनिया के भाव गत वर्ष की तुलना में 15 से 16 रुपए किलो तक घटे हुए हैं।

ऐसे में व्यापारी खरीद के प्रति उत्साहित हैं। फिलहाल दिसावर में माल की डिमांड नहीं है। इसके बावजूद वे माल खरीद कर अन्य मंडियों के व्यापारियों को बेचने की प्रक्रिया में उलझे हैं।

अभी मसाला कंपनियों ने धनिया की खरीद शुरू नहीं की है। मसाला कंपनियों की पूछपरख बढऩे पर भावों में रंगत आने की व्यापारियों को उम्मीद है।