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जनता के सिर कोटा की लाज, अबकी बार लगनी चाहिए स्वच्छता में छलांग

स्पॉटलाइट : सामूहिक प्रयास होंगे तो जीत लेंगे स्वच्छता की बाजी, कोटा को बनाएंगे स्वच्छ व सुन्दर, हर वार्ड को स्वच्छ बनाना होगा, 7500 अंक की परीक्षा में दिखाना होगा दमखम

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जनता के सिर कोटा की लाज, अबकी बार लगनी चाहिए स्वच्छता में छलांग

जनता के सिर कोटा की लाज, अबकी बार लगनी चाहिए स्वच्छता में छलांग

कोटा.
स्मार्ट सिटी कोटा की पहचान देश-दुनिया तक है, लेकिन हर साल होने वाले दुनिया के सबसे बड़े स्वच्छता सर्वेक्षण (Swachh Survekshan 2022) की रैकिंग में हमारा कोटा अपनी छाप नहीं छोड़ पा रहा है। इस साल फिर सर्वेक्षण की परीक्षा के दिन आ गए हैं, जिसमें कोटा को अच्छी रैंकिंग से आगे बढ़ाना है। इस बार कोटा की परीक्षा जनता के सिर-माथे पर है, क्योंकि सर्वेक्षण के सातवें चरण की थीम 'पहले जनता' रखी गई है। यानी जनता चाहेगी तो हमारा कोटा भी अन्य शहरों की तरह स्वच्छता में ऊंची छलांग लगाएगा। परीक्षा में अव्वल तब ही रहेंगे, जब जनता और अफसर मिलकर सर्वेक्षण के मानकों के अनुरूप शहर के हर वार्ड साफ-सुथरा बनाएंगे।

इस बार स्वच्छता की रैकिंग के लिए 7500 अंकों की परीक्षा होगी। इसमें सिटीजन वॉयस के करीब 30 प्रतिशत अंक निर्धारित हैं। शहर के लोग भी इसमें बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। जनता, जनप्रतिनिधि और निकाय ठान लें तो इस बार स्वच्छता में छलांग लगाई जा सकती है। सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग रोकने, ठोस कचरा प्रबंधन, विकास कार्यों की डिजिटल ट्रेकिंग जैसे कई विषयों पर तेजी से प्रगति करने वाले शहर ही इस दौड़ में टिक पाएंगे।


जनता ऐसे दें योगदान-

- लोग नाले और नालियों में कचरा नहीं फेंके। पड़ोस के खाली भूखण्डों को साफ रखें।
- घर या संस्थान का कचरा एकत्र कर निर्धारित पात्र या डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण वाहन में ही डालें।

- सार्वजनिक जगहों पर गंदगी नहीं फैलाएं। सार्वजनिक सम्पत्ति का विरूपण नहीं करें।
- जहां सीवरेज चालू है, वहां कनेक्शन लें ताकि गंदा पानी सीधे सीवरेज में जा सके।

- सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग बंद करें।


स्थानीय निकाय पूरी ताकत दिखाएं

- कचरा निस्तारण की प्रक्रिया को बेहतर बनाना होगा। कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाने होंगे।

- सूखे और गीले कचरे का अलग-अलग संग्रहण प्रभावी तरीके से हो।
- सड़कों व गलियों की सफाई इस तरीके से हों कि शहर में धूल के कणों का प्रदूषण नहीं फैलें।

- सफाई में लगे सभी संसाधनों का सदुपयोग हो। सिस्टम को प्रभावशाली बनाया जाएं।
- ट्रेंचिंग ग्राउंड पर आधुनिक तरीके से कचरे का निस्तारण किया जाएं।

- सबसे अच्छी सफाई वाले वार्ड व कार्मिकों को पुरस्कार देकर प्रतिस्पद्र्धा शुरू की जा सकती है।


पार्षद यह निभाएं जिम्मेदारी-

- अपने-अपने वार्ड को सबसे साफ-सुथरा बनाने की जिम्मेदारी लें।
- वार्ड के स्वच्छता वीरों को सहयोग प्रदान कर उनको प्रोत्साहित करते रहें।

- वार्ड का भ्रमण कर आमजन से फीडबैक लेते रहें और आमजन को कचरा व गंदगी नहीं फैलाने के लिए प्रेरित करें।
- निकायों की व्यवस्था में अनावश्यक दखल की बजाय कार्मिकों के सहयोगी बनकर काम कराएं।

स्वच्छता सर्वेक्षण : एक नजर

- इस बार स्वच्छता नमूने के लिए 100 प्रतिशत वार्डों को शामिल कर लिया गया है, पिछले वर्षों में यह आंकड़ा 40 प्रतिशत था।
- इस सर्वेक्षण में वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं की बात को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

- सर्वेक्षण के दस्तावेज की डिजिटल ट्रैकिंग, स्वच्छता की जियो टैगिंग जैसे बेहतर तकनीक हस्तक्षेप और बेहतर दक्षता के लिए कचरा प्रबंधन सुविधाओं का उपयोग बढ़ेगा।
- जनता तक पहुंच बढ़ाने के लिए क्यूआर कोड आधारित नागरिक प्रतिक्रिया का उपयोग होगा।

- 73 शहरों में स्वच्छता के मानकों पर शहरों को श्रेणीबद्ध करने के उद्देश्य से 2016 में शुरू किया गया था।
- अवार्ड भी मिलेंगे- राज्य स्तर पर प्रेरक दौड़ के तहत प्लेटेनियम, गोल्ड, सिल्वर, ब्रांजो और कॉपर की श्रेणी से शहरों को नवाजा जाएगा।

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मानक के अनुरूप काम करेंगे तो जीतेंगे

इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 की परीक्षा 7500 अंकों की होगी। अभी तक 6000 अंक तय थे, लेकिन स्वच्छ सर्वेक्षण के सर्वे से पहले 1500 अंकों की वृद्धि कर दी गई है। सबसे ज्यादा 3000 अंक सेवा स्तर प्रगति के तय किए हैं। सिटीजन वॉइस के लिए 2250 और प्रमाणीकरण के लिए 2250 अंक तय किए गए हैं। पहली बार सर्वे में सफाई मित्रों यानी सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा अहम होगी। सर्वे में कूड़ा प्रोसेसिंग, लिफ्टिंग, सफाई, सिंगल यूज प्लास्टिक बैन व कचरे को अलग-अलग करने व निस्तारण करने, प्लांट के लिए अंक निर्धारित है।

पिछली स्थिति
- 2021 में कोटा उत्तर को 1957 रैंक और दक्षिण को 1499 रैंक मिली।

- 2021 में कोटा उत्तर को 2033 अंक और दक्षिण को 2325 अंक मिले।

इनका कहना है-

स्वच्छता सर्वेक्षण में नागरिकों की मदद से कोटा भी आगे आ सकता है। सामूहिक प्रयासों से ही सफलता मिलेगी। निगम के स्तर पर भी प्रयास शुरू किए गए हैं।
- कीर्ति राठौड़, आयुक्त, कोटा दक्षिण निगम

सवाल :

स्वच्छता सर्वेक्षण में कोटा की रैकिंग कैसे सुधर सकती है, जनता कितना सहयोग दे सकती है? आप अपनी राय दें।

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