
आकाश से बरसती थी केसर, इसलिए पड़ा ‘केसर बर्डी’ नाम
- लोक आस्था
- माताजी का चमत्कारी धाम, आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम
बकानी. माचलपुर रोड मेगा हाईवे-89 पर दमक पुरिया टोल के पास स्थित केसर बर्डी पहाड़ी आज जन-जन की आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। विशाल एवं हरी-भरी पहाड़ी के ऊपर विराजमान माताजी के मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। यहां दूर-दराज से श्रद्धालु मन्नत लेकर पहुंचते हैं और श्रद्धा एवं विश्वास के साथ माता के दरबार में प्रार्थना करते हैं। मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु यहां प्रसादी का आयोजन भी करते हैं।
बुजुर्गों के अनुसार इस पहाड़ी का नाम केसर बर्डी पड़ने के पीछे प्राचीन मान्यता जुड़ी है। बताया जाता है कि कभी यहां आकाश से केसर बरसा करती थी। बुजुर्ग आज भी इस मान्यता के प्रमाण के रूप में यहां मौजूद कुछ निशानियों का उल्लेख करते हैं। पहाड़ी पर आज भी कई स्थानों पर केसर जैसी खुशबू महसूस होती है। इसी लोक मान्यता से पहाड़ी का धार्मिक महत्व बढ़ गया। श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान केवल मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक अनुभूति का केंद्र है।
विशेष बात यह है कि यहां किसी एक वर्ग या समुदाय के लोग नहीं, बल्कि सभी समुदायों के लोग श्रद्धा लेकर पहुंचते हैं। धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ यहां सामाजिक गतिविधियां भी होती रहती है। विभिन्न समुदायों की मासिक बैठकें यहां होती है। हर वर्ष यहां श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन होता है। इसमें हजारों श्रद्धालु कथा का श्रवण करते है।
पहाड़ी पर है भगवान देवनारायण का मंदिर
इसी विशाल पहाड़ी के ऊपर भगवान देवनारायण का पौराणिक मंदिर स्थित है। बुजुर्ग बताते हैं कि उन्होंने बचपन से इस मंदिर को इसी स्वरूप में देखा है और उनके दादा-परदादा भी यहां मंदिर होने की बात बताते थे। यही कारण है कि इस मंदिर से जुड़ी प्राचीनता और लोक आस्था श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का विषय बनी हुई है।
हरियाली से आच्छादित हुई पहाड़ी
कुछ समय पहले तक जहां पहाड़ी का स्वरूप अलग था, वहीं आज ग्रामीण श्रद्धालुओं की मेहनत और लगन से यहां सैकड़ों पेड़ लगाए जा चुके हैं। समय के साथ ये पौधे बड़े होकर छायादार पेड़ों का रूप ले चुके हैं। चारों ओर हरियाली से आच्छादित यह पहाड़ी प्राकृतिक सुंदरता का मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करती है। पहाड़ी के ऊपर पहुंचने पर दूर-दूर तक फैले गांवों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। यहां से कई किलोमीटर तक का क्षेत्र नजर आता है।
आस्था, इतिहास और प्रकृति का संगम (एक्सपर्ट व्यू)
मंदिर समिति के अध्यक्ष मोर सिंह चौहान के अनुसार केसर बर्डी केवल धार्मिक आस्था का स्थान नहीं, बल्कि लोकविश्वास, पौराणिक परंपरा, सामाजिक एकता और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम बन चुका है। एक ओर माताजी का मंदिर और भगवान देवनारायण का प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं, तो दूसरी ओर हरियाली से घिरी विशाल पहाड़ी यहां आने वाले लोगों को प्रकृति के करीब होने का अहसास कराती है। यहां जनसहयोग से हो रहे विकास कार्यों के चलते आने वाले समय में यह स्थान क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है। श्रद्धालुओं की आस्था, ग्रामीणों की मेहनत और प्रकृति की अनुपम सुंदरता ने केसर बर्डी को आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सौंदर्य से रमणीय धाम बना दिया है।
Updated on:
15 Aug 2026 06:01 am
Published on:
15 Aug 2026 06:01 am
