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एमबीएस अस्पताल आइसालेशन वार्ड के हाल… बीमारी नही ये गर्मी मार डालेगी!

आप देख लो साहब... सब मरीज वेन्टिलेटर पर चल रहे है। इस भीषण उमस के दौर में मरीज व तीमारदार गर्मी से घराब रहे है। इन कमरों में कूलर-एसी तक नहीं लगे है। तीन हजार रुपए देकर कू लर लेकर आया हूं। आधे मरीज तो गर्मी से ही मर रहे है।  
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कोटा

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Abhishek Gupta

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Updated: 17 Jun 2020, 1:11 PM IST

एमबीएस अस्पताल आइसालेशन वार्ड के हाल... बीमारी नही ये गर्मी मार डालेगी!

एमबीएस अस्पताल आइसालेशन वार्ड के हाल... बीमारी नही ये गर्मी मार डालेगी!

कोटा. आप देख लो साहब... सब मरीज वेन्टिलेटर पर चल रहे है। इस भीषण उमस के दौर में मरीज व तीमारदार गर्मी से घराब रहे है। इन कमरों में कूलर-एसी तक नहीं लगे है। तीन हजार रुपए देकर कू लर लेकर आया हूं। आधे मरीज तो गर्मी से ही मर रहे है। यह हाल है एमबीएस अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड का। वार्ड में भर्ती बूंदी जिले के कापरेन निवासी ललित के परिजन बलवीन्द्र शृंगी ने बताया कि उनके रिश्तेदार ने दवा पी ली। उसे चार दिन पहले एमबीएस अस्पताल लेकर आए। यहां उसे मेडिसिन आईसीयू में भर्ती किया, लेकिन दो दिन पहले उसे आईसीयू से कोरोना सन्दिग्ध वार्ड (आईसालेशन वार्ड ) में शिफ्ट कर दिया, लेकिन यहां मरीजों के लिए एसी-कूलर तक नहीं है। वेन्टिलेटर पर चल रहे मरीजों को देखने तक
डॉक्टर नहीं आते है। हर बार यहीं कहते है कि कोरोना चल रहा है, हम नहीं आएंगे। जबकि हम भी तो मरीजों के साथ रह रहे है। आज भी सुबह से शाम तक तीन बार डॉक्टर को बुलाने के लिए गया, लेकिन कोई नहीं आया।

पीड़ा से किसको सरोकार!

सरकार एक तरफ कोरोना संदिग्ध मरीजों को बेहतर सुविधा देने का दावा कर रही है, उनके लिए भारी भरकम बजट दे रही है, लेकिन एमबीएस अस्पताल प्रशासन को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती संदिग्ध मरीजों की पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है। जिम्मेदार अधिकारी एसी की हवा खाकर भी मरीजों व तीमारदारों की पीड़ा नहीं समझ रहे है। एक तरफ गर्मी का टॉर्चर, दूसरी तरह वेंटिलेटर से निकलने वाली गर्म हवाएं तीमारदारों के मुंह से बस यही शब्द निकलता है... उफ ये बीमारी नहीं ये गर्मी मार डालेगी।

दम तोड़ चुका मरीज

अस्पताल प्रबन्धन की लापरवाही के कारण मरीज व तीमारदार क्या करेगा। इसका नतीजा भी सबके सामने है, सोमवार को आसाइलेशन वार्ड में एक मरीज के परिजन ने गर्मी से राहत पाने के लिएवेन्टिलेटर का प्लग हटाकर उसकी जगह पर कू लर का प्लग लगा दिया। उसके बाद उसकी मौत हो गई। परिजन को
क्या पता था, गर्मी से राहत पाने के चक्कर में मरीज की सांसें टूट जाएगी।

इन हालातों में हो रहा इलाज...

आइसोलेशन वार्ड में संदिग्ध मरीज भर्ती है। यहां इन मरीजों व तीमादरों में संक्रमण नहीं फैले। इसके
लिए सफ ाई व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए, लेकिन यहां कई कमरों में गंदगी की भरमार है। फ र्शी पर खून के धब्बे बिखरे पड़े है। खिड़कियों में पुरानी दवइयां रखी पड़ी है। डस्टबिन में भी कचरा भरा रहता है।

इनका यह
कहनाआइसोलेशन वार्ड में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। इस वार्ड में कूलर व एसी नहीं लगा सकते है। डॉक्टर दोनों समय सुबह-शाम मरीजों को राउंड कर देख रहे है।

डॉ. नवीन सक्सेनाए अधीक्षकए एमबीएस