
सौर ऊर्जा से जगमग होगा पूरा आरटीयू परिसर
कोटा. राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय पूरी तरह से सोलर ऊ र्जा से जगमग हो जाएगा। विवि शीघ्र एक 300 किलो वाट के सोलर पावर प्लांट की स्थापना करने जा रहा है। इससे विवि की बिजली की संपूर्ण आपूर्ति सोलर पावर से हो जाएगी और जो अतिरिक्त बिजली का उत्पादन होगा, वह बिजली कम्पनी केडीईएल को भेज दी जाएगी। ग्रीन कैम्पस के तहत सोलर प्लांट लगाने के कार्य आदेश जारी हो चुके है। इसका कार्य तीन से चार माह में पूरा हो जाएगा। पुराने सोलर प्लांट से विभिन्न लाभों को देखते हुए आरटीयू नए सोलर पावर प्लांट की स्थापना करने जा रहा है। इस प्लांट से संपूर्ण विवि की बिजली की आपूर्ति ग्रीन एनर्जी एवं क्लीन एनर्जी से हो जाएगी। यह संपूर्ण कार्य विवि के संपदा अधिकारी डॉ. एसके माथुर व उनकी टीम कर रही है। आरटीयू के डीन प्रो. अनिल के माथुर ने बताया कि पुराना सोलर पैनल विवि के प्रशासनिक भवन, परीक्षा भवन, कंप्यूटर सेंटर, लेक्चर थियेटर की छत पर लगभग 1200 सोलर प्लेट में लगा हुआ है। इस एक और प्लांट के लगने से कुल 600 किलो वाट से पूरे 350 एकड़ का परिसर सौर ऊर्जा से जगमग हो जाएगा।
प्रतिवर्ष चार लाख यूनिट बिजली का हो रहा उत्पादन
इससे पहले आरटीयू परिसर में 300 किलो वाट पावर का सोलर पावर प्लांट जनवरी 2018 से कार्य कर रहा है, जिसकी लागत लगभग 1.8 करोड़ रुपए आई थी। यह कार्य रूसा के बजट करवाया गया था। इस प्लांट से प्रतिवर्ष लगभग चार लाख यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। विवि द्वारा स्वयं की आवश्यकता उपरांत शेष बिजली कम्पनी केडीईएल कोटा को सपोर्ट कर दी जाती है। इससे तकनीकी विश्वविद्यालय को प्रति वर्ष लगभग 4,00000 की आय होती है।
सोलर प्लांट लगाने के ये फ ायदे
इससे कार्बन फु टप्रिंट में कमी आती है और पोलूशन कम होता है। पर्यावरण को होने वाली हानि कम हो जाती है।
यह प्लांट लगाने से अन्य प्लांट की तरह किसी तरीके की आवाज नहीं होती। इसलिए नॉइस पोलूशन से भी बचा जा सकता है।
सोलर प्लांट से बिजली के बिल में भी भारी कमी आती है। इसकी मेंटेनेंस के चार्जेज भी न्यूनतम है।
सोलर एनर्जी एक रिन्यूएबल एनर्जी है। जिससे हम अनंत काल तक सूर्य की ऊर्जा का उपयोग कर सकते हैं।
सोलर एनर्जी से बिजली के निर्माण में लगने वाली लागत भी कम लगती है।
Published on:
09 Jul 2020 11:54 am
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