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Mandi News: मंडी में मुहूर्त के सौदे में धनिया का पहला ढेर 11111 रुपए में बिका

सेठ भामाशाह अनाज मंडी में 6 दिवाली अवकाश के बाद गुरुवार को धनिया की नीलामी से मुहूर्त के सौदे हुए। इस दौरान मुहूर्त के सौदे में धनिया का पहला ढेर 11111 रुपए प्रति क्विंटल बिका तो दूसरे ढेर की बोली लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लगाई जो 7501 रुपए प्रति क्विंटल में बिका।

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सेठ भामाशाह अनाज मंडी में 6 दिवाली अवकाश के बाद गुरुवार को धनिया की नीलामी से मुहूर्त के सौदे हुए। इस दौरान मुहूर्त के सौदे में धनिया का पहला ढेर 11111 रुपए प्रति क्विंटल बिका तो दूसरे ढेर की बोली लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लगाई जो 7501 रुपए प्रति क्विंटल में बिका।

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कोटा ग्रेन एण्ड सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अविनाश राठी ने बताया कि निलामी शुरू करने से पूर्व मंडी गेट पर गणेशजी की पूजा अर्चना की गई। इसके बाद मंडी चौराहा स्थित सेठ भामाशाह की प्रतिमा पर माल्यापर्ण किया गया। 9.30 बजे विधि विधान से गणेशजी का पूजन और महाआरती की गई। महाआरती में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी मौजूद रहे। इस दौरान किसानों को नुक्ती एवं गुड़ व धनिया के लड्डूओं का वितरण किया गया। इस दौरान एसोसिएशन के महामंत्री महेश खण्डेलवाल, कोषाध्यक्ष सुनील मेहता, पदम जैन, सुशील गम्भीर, रवि प्रकाश बुच्चा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

उन्होंने बताया कि 10.30 बजे शुभ मुहूर्त में धनिया की नीलामी शुरू करवाई गई जिसमें पहला ढेर 11111 रुपए व दूसरा ढेर 7501 रुपए प्रति क्विंटल बिका। इसके बाद शुभ मुहूर्त में दीपावली के 6 दिन के अवकाश के बाद पुन: व्यापार शुरू हुआ। दीपावली के बाद पहले दिन मंडी में 2.50 लाख कट्टे कृषि जिंस की आवक हुई जिसमें 1.50 लाख बोरी धान, 20 हजार कट्टे धनिया व 80 हजार कट्टे अन्य कृषि जिंसों की आवक हुई।

इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने व्यापारियों, श्रमिकों व किसानों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए सुख समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि भामाशाहमंडी के व्यापारियों व किसानों को जो गहरा रिश्ता व किसानों को मंडी के प्रति विश्वास व भरोसा यहां के अलावा मैंने कहीं नहीं देखा। इस विश्वास व भरोसे को हमें कायम रखना है। गांवों में जाते है तो किसान शिकायत करते हैं कि मंडी छोटी पड़ती है। मैं किसानों को आश्वासन देता हूं कि अगली दीपावली तक इसका विस्तार हो जाएगा। इसमें कई समस्याएं व कठिनाइयां है, लेकिन उन्हें दूर करने का प्रयास करेंगे। क्योंकि इस मंडी की प्रतिष्ठा देशभर में होने से यहां किसान अपनी उपज बेचने आते हैं। किसान देश का अन्नदाता है, उनकी उन्नति देश की प्रगति और समाज की खुशहाली का मार्ग प्रशस्त करती हैं।