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seven wonders in kota कोटा में हैं दुनिया के सात अजूबे, क्या आपने देखें

कोटा में हैं दुनिया के सात अजूबे, छह सालों में 18 लाख से अधिक लोगों ने देखा अजूबों से भरे पार्क को

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कोटा

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Deepak Sharma

Sep 27, 2019

ajmer

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कोटा. चांदी सी चमकती किशोर सागर की लहरे, पहले भी किनारों से टकरवाया करती थी, पर तब किनारों का रुतबा ऐसा नहीं था। सागर था, पर गहराई नहीं थी, किनारे थे पर रोशन नहीं थे। किसी समय वल्लभबाड़ी में इस जगह पर गंदगी, कचरे का ढेर और अतिक्रमण था। उसी जगह को देखने के लिए लोग जुटते हैं। बात हो रही है सेवन वंडर्स पार्क की। किशोर सागर तालाब की पाल पर 2013 में बनकर तैयार हुआ SEVEN WONDERSसेवन वंडर्स पार्क देशी-विदेशी सैलानियों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं है।

नगर विकास न्यास के ही सूत्रों के मुताबिक इस पार्क को देखने के लिए प्रतिदिन एक हजार लोग पहुंचते हैं। कोटा, बूंदी और झालावाड़ में पिछले 4 सालों में जितने पर्यटक नहीं पहुंचे, उससे कहीं अधिक पर्यटकों ने सेवन वंडर्स पार्क को देखा है। एक अनुमान के मुताबिक अब तक इसे 18 लाख से अधिक लोगों ने देखा है।

पिछले दो सालों से पार्क की व्यवस्था व रखरखाव ठेका फर्म कर रही है। मैनेजर राहुल न्याती ने बताया कि यह पार्क हर वर्ग के लोगों के लिए समान आकर्षण पैदा करता है। उनके पास देशी-विदेशी पर्यटकों के आंकड़े नहीं हैं लेकिन, कोटा आने वाले हर व्यक्ति के जेहन में सेवन वंडर्स पार्क अमिट छाप छोड़ता है।

एक नहीं, कई हैं कारण
पर्यटन की दृष्टि से कोटा अपने आप में संपूर्ण है। यहां जल-जंगल, कला-संस्कृति और विरासत एक साथ मौजूद हैं। आमतौर पर राजस्थान को लेकर लोगों के मन में रेगिस्तान वाले रेतीले प्रदेश की छवि है। हाड़ौती इस भ्रांति को पूरी तरह से दूर कर देता है। जिला पर्यटन अधिकारी संदीप श्रीवास्तव बताते हैं कि सेवन वंडर्स यहां का सबसे बड़ा आकर्षझा है। देश और दुनिया के लोगों ने इसे देखा और सराहा है। बद्रीनाथ की दुल्हनिया फिल्म की लोकेशन बनने के बाद तो यह पर्यटन के नक्शे वर छा गया है। कोटा में एÓयूकेशन टूरिÓम भी बढ़ रहा है। कोटा में डेढ़ लाख ब"ो यहां के कोचिंग संस्थानों में पढ़ रहे हैं। करीब ढाई लाख परिजन यहां आते हैं। इससे भी कोटा में पर्यटन बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में टाइगर रिजर्व इसमें एक नया आयाम जोड़ेगा।

अपूर्व संभावनाएं
कोटा में टूरिÓम की अपूर्व संभावनाएं है। विभाग इस क्षेत्र में प्रचार-प्रसार कर रहा है। आने वाले दिनों में कोटा ईको ट़रिÓम का हब बनेगा। पर्यटकों की संख्या के साथ रोजगार भी बढ़ेगा।
विकास पांड्या, उपनिदेशक, पर्यटन विभाग

थोड़ा इनके बारे में जानें
1. क्राइस्ट द रिडीमर
कैथोलिक इसाई स्मारक क्राइस्ट द रिडीमर की विशाल प्रतिमा ब्राजील के रियो डि जेनेरियो शहर के बाहर एक ऊंची पहाड़ी पर शहर की तरफ देखती हुए बनी है। इसकी ऊंचाई 38 मीटर है। इसके दोनों हाथों के मध्य की दूरी 28 मीटर है। सेवन वंडर्स पार्क में इसकी प्रतिकृति 2.50 मीटर ऊंची है। इसे 6 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया है।

2. ताज महल
उप्र के आगरा में सफेद संगमरमर से बनी 35 मीटर ऊंची सुंदर इमारत है। मुगल शासक शाहजहां ने अपनी तीसरी पत्नी मुमताज की याद में 1632 में इसका निर्माण प्रारंभ करवाया। मुख्य इमारत 1648 में बनकर पूरी हुई। आस-पास की इमारतें व बगीचे का निर्माण पांच साल बाद किया गया। कोटा में इसकी प्रतिकृति की ऊंचाई 7.50 मीटर है।

3. मिस्र का पिरामिड
त्रिभुज आकर में विशाल पत्थरों से बना ये ढांचा मिस्र के गीजा शहर के नजदीक स्थित है। दुनिया भर के पर्यटकों के लिए हॉट स्पॉट बने इस पिरामिड की एक भुजा की लंबाई 230.40 व ऊंचाई 137.16 मीटर है। यह विशालकाय आयताकार पत्थरों से निर्मित है। सेवन वंडर्स पार्क में बनी इसकी प्रतिकृति 7.50 मीटर ऊंची है।

4. रोम का कॉलिजियम
यह इटली के रोम शहर में है। इसे फ्लेविन एम्फीथियेटर के नाम से जाना जाता है। इसका निर्माण वेस्पेशियन ने इसवी सन 72 में इसका निर्माण करवाया। पुत्र टाइटस ने इसे सन 80 में पूर्ण करवाया। इसकी लंबाई 188 व चौड़ाई 156 मीटर है। कोटा में बनी इसकी प्रतिकृति 15 मीटर लंबी व 12 मीटर चौड़ी है।

5. पीसा की झुकी मीनार
इटली के पीसा शहर में यह मध्ययूगीन यूरोप के अद्भुत वास्तुशिल्प और इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना है। इसका निर्माण 1173 में शुरू हुआ। लगातार युद्धों के चलते 200 सालों तक निर्माण चला। यह गोलाकार मीनार है, जिसकी ऊंचाई 60 मीटर है। कोटा में इसकी प्रतिकृति की ऊंचाई लगभग 18 मीटर है।

6. एफिल टावर
दुनिया की सबसे चर्चित इमारतों और ढ़ाचों में शुमार एफिल टावर का निर्माण 1887 से 1889 के दौरान पेरिस में हुआ। इसके शीर्ष पर लगे एंटीने सहित इसकी ऊंचाई 320.75 मीटर है। 1930 से पहले तक यह विश्व की सबसे ऊंची इमारत मानी जाती थी। यह स्टील से बनी हुई है। कोटा का एफिल टावर 30 मीटर ऊंचा है।

7. स्टे'यू ऑफ लिबर्टी
अमेरिका और फ्रांस ने इसका निर्माण करवाया। मूर्ति का निर्माण फ्रांस में 1884 में हुआ। 1885 में इसे न्यूर्याक भेजा। पेडस्टल का निर्माण 1886 में हुआ। इस पर 28 अक्टूबर 1886 को मूर्ति स्थापित की गई। मूर्ति की ऊंचाई 46.50 मीटर है। पेडस्टल भी इतना ही ऊंचा है। कोटा में इसकी ऊंचाई पेडस्टल सहित 10 मीटर है।