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पेपर कप मैन्युफैक्चरिंग:एक आदेश से राजस्थान की तीन हजार इकाइयों पर संकट

राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से 14 जुलाई जारी अधिसूचना में पेपर निर्मित उत्पाद जैसे पेपर कप, पेपर क्लास, पेपर पत्तल दोने आदि को भी प्रतिबंध की श्रेणी में शामिल कर 15 दिन में निर्माताओं को भंडारण एवं निर्माण बंद करने के आदेश जारी कर दिए। आदेश से तीन हजार इकाइयों में 400 करोड़ की लागत की मशीनरी 600 करोड़ के भंडारण पूर्ण रूप से कबाड़ हो जाएंगे। प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

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Abhishek Gupta

Jul 26, 2022

एक जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक की कैटेगिरी को पूर्णतया प्रतिबन्धित कर दिया। इसके बाद राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से 14 जुलाई जारी अधिसूचना में पेपर निर्मित उत्पाद जैसे पेपर कप, पेपर क्लास, पेपर पत्तल दोने आदि को भी प्रतिबंध की श्रेणी में शामिल कर 15 दिन में निर्माताओं को भंडारण एवं निर्माण बंद करने के आदेश जारी कर दिए। इससे कई इकाइयों का भविष्य संकट में आ गया है। आदेश से तीन हजार इकाइयों में 400 करोड़ की लागत की मशीनरी 600 करोड़ के भंडारण पूर्ण रूप से कबाड़ हो जाएंगे। प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इसी संकट को दूर करने के लिए कोटा दीएसएसआई एसोसिएशन व पेपर कप मैन्युफैक्चरर सोसायटी राजस्थान की बैठक सोमवार को पुरुषार्थ भवन कोटा में आयोजित की गई।

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बैठक में संस्थापक अध्यक्ष गोविंद राम मित्तल, अध्यक्ष राजकुमार जैन, सचिव अनीश बिरला, दी पेपर कप मैन्युफैक्चरिंग सोसाइटी राजस्थान के अध्यक्ष आरएस शेखावत, सचिव अक्षत तांबी आदि प्रदेशभर से आए उद्यमियों ने अपनी बात रखी और 15 दिन के अंदर संपूर्ण व्यवसाय को बंद करने को एक अव्यवहारिक बताया। उन्होंने सरकार से तीन वर्ष की मांग रखी है।उद्यमी अंकित मित्तल ने बताया कि नमकीन, बिस्कुट, चिप्स, कुरकुरे के प्लास्टिक पाउच को प्रतिबंध से मुक्त रखा गया। केवल पेपर कप मैन्युफैक्चरिंग पर ही इस आदेश की गाज गिरी है। जिसमें मात्र 5 प्रतिशत प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है।

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फैक्ट फाइल

1. लगभग 1 लाख लोगों के बेरोजगार होने का खतरा, लगभग 30,000 व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए। 70,000 व्यक्ति अप्रत्यक्ष रूप से जुडे हुए (छोटे वितरण, माल वाहक मजदूर, रेडी ठेले वाले)
2. लगभग 400 करोड़ रुपए की मशीनरी के कबाड़ होने का खतरा।
3. दिए गए समय में भण्डारण का निपटारण असंभव है। लगभग 600 करोड़ का कागज का भण्डारण शून्य हो जाएगा।
4. लगभग 3000 इकाइयों के बन्द होने पर संकट, कागज के निर्मित उत्पादों में पेपर कप ग्लास, कगज के पत्तल दोने से संबन्धित सभी छोटी बडी इकाइयां शामिल है।
5. विश्व पटल पर कागज उत्पाद- जिन उत्पादों पर सरकार बैन लगाना चाहती है वे भारत से बडी मात्रा में निर्यात होते है और वो भी उन विकसित देशों में जो प्रदूषण नियत्रंण में अहम भूमिका रखते है जैसे की यूरोपियन देश, अमेरिका आदि।

6. बडी कम्पनियों को एसयूपी में छूट और छोटी इकाइयों के लिए प्रतिबन्ध, जारी अधिसूचना के अन्तर्गत सभी फूट पैकेजिंग मेटेरियल जैसे चिप्स कुरकुरे, छोटे पाउच जैसे सुपारी, गुटका, नमकिन, बिस्किट, दूध का पैकेट आदि निर्माण इकाइयों को छूट दी गई है जो कि 100 प्रतिशत प्लास्टिक से निर्मित है। पैपर कप में नाम मात्र का 3 से 5 प्रतिशत प्लास्टिक कोटिंग है, जो मेटेरियल होल्डिंग के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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