2025 तक हजार करोड़ का हो जाएगा कोटा का पर्यटन कारोबार, 2.5 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

2025 तक हजार करोड़ का हो जाएगा कोटा का पर्यटन कारोबार, 2.5 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

Rajesh Tripathi | Publish: Mar, 12 2019 08:05:02 AM (IST) Kota, Kota, Rajasthan, India

अगले पांच साल में 2 से 2.5 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार,18 सेक्टर
में मौजूद हैं 320 से ज्यादा टूरिज्म अपॉरच्युनिटी

कोटा. भौचक कर देने वाली चूलिया फॉल और गरडिय़ा की पहाडिय़ों की अदम्य प्राकृतिक खूबसूरती...आस्था की जोत जलाते हजारों साल पुराने मंदिर...राजसी वैभव को जीवंत करते गढ़ और पैलेस...दुनिया घूमने का रोमांच पैदा करते सात अजूबे...दुर्लभता से भरी चम्बल की कराइयों से लेकर...वैभवशाली संस्कृति से मेल कराता दशहरा मेला... 'बद्रीनाथ की दुल्हनियाÓ और हॉन्टेड पैलेस की तलाश में घूमते नए दौर के यायावरों में रोमांच जगाते यायावरी के ठिकाने... हर उम्र और शौक के पर्यटकों को कोटा तक खींच लाने के लिए काफी थे... कुछ कमी थी तो ऐसे ब्रांड अम्बेस्डर की जो इस बिखरी हुई विरासत को बांध सके...दुनिया के सबसे नए टाइगर रिजर्व में तीन बाघों की आमद के साथ अब यह खामी भी खुशी में तब्दील हो चुकी है। मुकुंदरा के आबाद होने से न सिर्फ कोटा में यायावरी के वैभव को चार-चांद लगेंगे, बल्कि जैसे ही इस टाइगर रिजर्व के दरवाजे पर्यटकों के लिए खुलेंगे, कोटा में विदेशी पर्यटकों का रैला उमड़ पड़ेगा। कोटा में कंपलीट टूरिज्म पैकेज मौजूद होने के कारण यहां सिर्फ वाइल्ड लाइफ टूरिस्ट ही नहीं बल्कि पूरी टूरिस्ट फैमिली आने को उतावली होगी। साल 2025 तक जब सब कुछ करीने से सहेजा जा चुका होगा। माना जा रहा है कि तब कोटा में पढऩे वाले छात्रों के परिजनों समेत करीब छह लाख पर्यटक सालभर में यहां आएंगे।

2.5 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार
टैक्सी ड्राइवर से लेकर वेंडर, होटल और गाइड ही नहीं सड़क किनारे खाने-पीने का सामान बेचने वाले से लेकर कलात्मक चीजें बनाने वाले से लेकर कोटा डोरिया साड़ी बनाने वाले तक को रोजगार मिलेगा। सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो पर्यटन उद्योग के जरिए साल 2025 तक कोटा में 2 से 2.5 लाख लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

फैक्ट फाइल
मुकुंदरा राष्ट्रीय उद्यान, दरा अभयारण्य, जवाहर सागर व चंबल घडिय़ाल अभयारण्य को मिलाकर बना मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व

फिलहाल प्रति वर्ग किमी 708 किलोग्राम का प्री-बेस मौजूद
759.99 वर्ग किमी में फैला टाइगर रिजर्व
417.17 वर्ग किमी का क्रिटिकल टाइगर हैबीटेट और 342.82 वर्ग किमी का बफर जोन
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के मानकों के मुताबिक एक साथ 8 टाइगर लाकर बसाए जा सकते हैं
वन विभाग 2025 तक यहां 25 बाघ बसाने की योजना बना रहा है

1. दुर्लभ जीव और पक्षियों का बसेरा

करीब 60 भालू, करीब 70 पैंथर, 70 से ज्यादा सांभर और 1000 से ज्यादा चीतल से लेकर बघेरे, भेडि़ए, चिंकारा, काले हिरन, ही नहीं विलुप्त होने की कगार पर खड़े ऊदबिलाव, स्याहगोह, निशाचर सिविट केट और रेटल जैसे दुर्लभ प्राणी। अति दुर्लभ सफेद पीठ और लंबी चोंच वाले गिद्द, क्रेस्टेड सरपेंट, शॉट टोड ईगल, सारस क्रेन, पैराडाइज प्लाई केचर, स्टोक बिल किंगफिशर, कलर्ड स्कोप्स आउल, नीलकंठ और सुर्खाब से लेकर मोर जैसे आकर्षक पक्षियों की 225 से ज्यादा तरह की प्रजातियां।

2. 10 लाख साल पुरानी सभ्यता
टाइगर रिजर्व का सबसे बड़ा आकर्षण इंसानी सभ्यता के 10 लाख साल से ज्यादा पुरानी वो निशानियां हैं, जिन्हें आदिमानव ने रॉक पेटिंग की शक्ल में पत्थरों पर उकेरा था। आर्याव्रत के प्रवेश द्वार की सदियों से रक्षा करने वाला आखिरी बार बिना नींव के खड़ा 12वीं सदी का गागरोन फोर्ट, 17वीं शताब्दी का अबली मीणी महल, खजुराहो जैसी कलात्मक विविधता लिए आठवीं सदी में गढ़ा गया बाड़ोली मंदिर समूह, भैंसरोडगढ़, रावठा महल और हाड़ा शासकों की शिकारगाह समेत तमाम रिसायतकालीन धरोहरें हैं।

3. वाटर सफारी
सदानीरा चंबल वाइल्ड लाइफ टूरिस्ट को वाटर सफारी का एडवेंचर भी मुहैया कराएगी। जवाहर सागर से भैंसरोडगढ़़ तक के 25 किमी लंबे जंगलों के बीच और चंबल गार्डन से गरडिय़ा महादेव तक फैली चंबल की निहायत खूबसूरत कराइयों के बीच वाटर सफारी बनाकर बोटिंग कराई जाएगी।

सब कुछ दिखेगा यहां
1- वाइल्ड लाइफ टूरिज्म
2- डार्क टूरिज्म
3- हैरिटेज टूरिज्म
4- नेचर टूरिज्म
5- एज्युकेशन टूरिज्म
6- स्पोट्र्स टूरिज्म
7- एडवेंचर टूरिज्म
8- रिलीजियस टूरिज्म
9- कल्चर टूरिज्म
10- फूड टूरिज्म
11- फिल्म टूरिज्म
12- एग्री टूरिज्म
13- ट्राइबल टूरिज्म
14- विलेज टूरिज्म
15- एमआईसीई ( मीटिंग, इन्सेंटिव्स, कान्फ्रेंसिंग एंड एग्जीबिशन)
16- इंडस्ट्री टूरिज्म
17- मेडिकल टूरिज्म
18- ईको टूरिज्म


एक्सपर्ट कमेंट
कोटा का मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व एरिया पश्चिम बंगाल के सुंदर वन राष्ट्रीय अभयारण्य से खासी साम्यता रखता है। सुंदर वन में भले ही बाघों की संख्या बेहद ज्यादा हो, लेकिन वन्य जीव एवं वनस्पतियों के मामले में मुकुंदरा उससे बिल्कुल भी कमतर नहीं है। एक दौर था जब सुंदर वन को पर्यटकों के लिए जूझना पड़ रहा था, लेकिन राज्य सरकार ने बाघों के संरक्षण और वन्य जीव संपदा को संरक्षित करने में ऐसी जान झौंकी कि यूनेस्को ने उसे वल्र्ड हैरिटेज साइट घोषित करना पड़ा। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व प्रशासन को चाहिए कि वह सुंदर वन की तरह वाइल्ड लाइफ टूरिज्म के हर सेक्टर को डवलप करे और वन्य जीव संपदा को संरक्षित कर उसका प्रमोशन करे। कोटा के साथ एक बड़ी सकारात्मक बात यह है कि यहां वाइल्ड लाइफ के अलावा पर्यटन के दस गुना ज्यादा क्षेत्र मौजूद हैं, जो बाघों की संख्या की कमी को आसानी से पूरा कर रोमांच के नए विकल्प मुहैया कराने में सक्षम होंगे।

अजीजुल हसन, टूरिज्म रिसर्चर एवं कन्सल्टेंट, लन्दन
(पिछले पांच साल से राजस्थान के विविध पर्यटन क्षेत्रों पर अन्तरराष्ट्रीय शोधकर्ता)

 

 

 

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