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कागजों में दो निगम, सफाई व्यवस्था एक के हिसाब से

सरकार के आदेश पर दो निगम में 150 वार्ड हो गए, घर-घर कचरा संग्रहण के टेण्डर 65 वार्डों के होंगे, सवाल : वार्डों का सीमांकन हो गया, सफाई का बंटवारा क्यों नहीं?

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कागजों में दो निगम, सफाई व्यवस्था एक के हिसाब से

कागजों में दो निगम, सफाई व्यवस्था एक के हिसाब से

कोटा. राज्य सरकार ने शहर में कोटा दक्षिण और कोटा उत्तर दो नगर निगमों का गठन कर दिया है। अब शहर में 65 वार्डों से बढ़कर 150 वार्ड हो गए हैं, लेकिन सरकार ने दो निगम के हिसाब से न तो संसाधन उपलब्ध करवाए, न बजट। इस कारण आगामी एक साल तक पुरानी व्यवस्था से ही शहर की सफाई व्यवस्था की जाएगी। निगम फिलहाल 65 वार्डों के हिसाब से ही काम करेगा। यानी दो निगमों की व्यवस्था केवल कागजी साबित होगी।


नगर निगम की ओर से घर-घर कचरा संग्रहण के लिए आगामी एक साल के लिए टिपर संचालन के ई-टेण्डर जारी किए हैं। निगम के मौजूद तीन खण्डों के अनुसार ही टिपर संचालन किया जाएगा। जबकि दो नगर निगम के हिसाब से वार्डों का पुनर्गठन हो गया है। ऐसे में नया बोर्ड बनते ही सफाई के संसाधनों को लेकर खींचतान शुरू हो जाएगी। निगम प्रशासन ने मौजूदा व्यवस्था में शहर को तीन खण्डों में बांट रखा है। इसमें मोटे तौर पर खण्डों का विभाजन विधानसभावार किया गया है।


ऐसे होगी टिपरों से सफाई व्यवस्था

निगम उपायुक्त की ओर से जारी ई-टेण्डर में तीन खण्डों के अनुसार ही टिपरों का संचालन किया जाएगा। पुराने निगम के हिसाब से रामपुरा जोन में कुल 22 वार्ड हैं। इस जोन में ऑटो टिपर से घर-घर कचरा संग्रहण किया जाएगा। मुख्यालय जोन में 24 वार्डों में टिपर से घर-घर कचरा संग्रहण किया जाएगा। विज्ञान नगर जोन के 19 वार्डों में टिपर से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र किया जाएगा। इसके ई-टेण्डर मांगे गए हैं।

सफाई पर दक्षिण में होगा ज्यादा खर्च
निगम के अनुसार कोटा दक्षिण में टिपर से कचरा संग्रहण में सबसे ज्यादा राशि खर्च होगी। चार करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जाएगी। निगम की ओर से प्रत्येक वार्ड में तीन-तीन टिपर लगाए जाने प्रस्तावित हैं।


टिपर संचालन में है घालमेल

निगम की ओर से करीब तीन साल पहले शहर में घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था शुरू की गई थी। सबसे पहले कोटा दक्षिण के चुनिंदा वार्डों में अजमेर की एक फर्म ने घर-घर कचरा संग्रहण की सेवा शुरू की। एक टिपर पर निगम की ओर से करीब 37500 हजार रुपए का भुगतान किया जाता है, लेकिन पिछले दो साल में निगम प्रशासन की ओर से की गई जांच में सामने आया कि वार्डों में पूरे टिपर का संचालन नहीं होता।

तत्कालीन आयुक्त डॉ. विक्रम जिंदल ने एक साथ शहर में संचालित पूरे टिपर को निगम भवन में एकत्र किया और प्रत्येक टिपर की गिनती की तो करीब 40 टिपर कम पाए गए थे। इसके अलावा औचक जांच में भी टिपरों का संचालन सुचारू नहीं पाया गया। टेण्डर शर्तों में संवेदक को चालक के साथ हेल्पर भी रखना था, लेकिन एक भी हेल्पर नहीं रखा गया और निगम के सफ ाई कर्मचारी को ही हेल्पर के तौर पर लगाया गया है। इससे निगम को दोहरा नुकसान हुआ है।

पार्षद ही थे टिपर ठेकेदार
भाजपा बोर्ड में कोटा दक्षिण के एक पार्षद की तो टिपर संचालन में अघोषित पार्टनरशिप थी। कोटा दक्षिण के तत्कालीन पार्षद के आधा दर्जन से अधिक टिपर पत्नी व अन्य रिश्तेदारों के नाम से संचालित कर रखे थे। तत्कालीन पार्षद ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए खुद के वार्ड में ही टिपर लगा रखे थे। जांच में सामने आया था कि तत्कालीन पार्षद पूरे टिपर तक नहीं संचालित कर रहे थे।


जोनवार स्थिति

जोन कुल वार्ड अनुमानित राशि खर्च
रामपुरा 22 3,73,74,480

मुख्यालय 24 4,07,72,160
विज्ञान नगर 19 3,22,77,960