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उम्मेदगंज पक्षी विहार: पानी का प्रवाह हो तो किसानो को आनंद न हो तो पक्षियों को

पानी छिछला क्या हुआ स्थानीय पक्षियों के कलरव व अठखेलियों से उम्मेदगंज तालाब आबाद हो गया।

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कोटा .

नहरों में पानी का प्रवाह हो तो किसानों को आनन्द और प्रवाह बंद हो जाए तो पक्षियों को आनन्द। जी हां, नहरों में पानी का प्रवाह बंद होते ही पक्षियों की मौज हो गई। पानी छिछला क्या हुआ स्थानीय पक्षियों के कलरव व अठखेलियों से उम्मेदगंज तालाब आबाद हो गया। तालाब में इन दिनों स्थानीय पक्षियों का बसेरा नजर आने लगा है।

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हाड़ौती नेचुर्लिस्ट सोसायटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ए एच जैदी के अनुसार उम्मेदगंज के तालाब में इस वर्ष विभिन्न प्रजातियों के 2500 से 3 हजार की संख्या में पक्षी हैं।

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इनमें 100 से अधिक पेंटेड स्टोर्क, 40 से अधिक ओपन बिल स्टोर्क, दर्जन भी वूली नेक स्टोर्क, दो सारस परिवार, 100 से अधिक ग्लोसी व व्हाइट आईबीस, 24 से अधिक स्पून बिल, 4 जोड़े नकटा तथा करीब दो हजार इग्रेट हैं। यहां छह से दस माह के बीच के पेंटेड स्टोर्क व ओपन बिल स्टोर्क के बच्चे भी हैं।

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पानी घटने का इंतजार इसलिए
शोध विद्यार्थी हर्षिता शर्मा व आदिल सेफ ने बताया कि पक्षी छिछले पानी में रहना पसंद करते हैं। जैसे ही नहरों में जल प्रवाह बंद होता है तालाब में भी पानी कम हो जाता है। इससे कई कीट व छोटी मछलियां पानी में दिखाई देने लगते हैं और पक्षियों को अपना भोजन मिल जाता है। जलाशयों में मतस्याखेट पर रोक लगनी चाहिए, ताकि इन पक्षियों को भोजन मिल सके।

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