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Video: तीन आईआईटीयन दोस्तों का आधुनिक कृषि में कमाल, बिना मिट्टी केवल पानी में शुरू की सब्जियोंं की खेती

राजस्थान के तीन आईआईटीयन दोस्तों ने आधुनिक कृषि में बड़ा कमाल कर दिखाया है। यह आईआईटीयन है कोटा निवासी अंकित राठी व अभय सिंह और श्रीगंगानगर के अमित कुमार। तीनों ने आईआईटी मुम्बई से बीटेक किया है। तीनों ने किसी बड़ी कम्पनी में नौकरी के प्रयास करने की बजाय आधुनिक कृषि की तरफ कदम बढ़ाकर मिसाल बनाई है। तीनों ने मिलकर कोटा में बिना मिट्टी व कोकोपिट्स एवं बिना पेस्टीसाइड्स से आधुनिक खेती का स्टार्टअप शुरू किया है।

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कोटा. राजस्थान के तीन आईआईटीयन दोस्तों ने आधुनिक कृषि में बड़ा कमाल कर दिखाया है। यह आईआईटीयन है कोटा निवासी अंकित राठी व अभय सिंह और श्रीगंगानगर के अमित कुमार। तीनों ने आईआईटी मुम्बई से बीटेक किया है। तीनों ने किसी बड़ी कम्पनी में नौकरी के प्रयास करने की बजाय आधुनिक कृषि की तरफ कदम बढ़ाकर मिसाल बनाई है। तीनों ने मिलकर कोटा में बिना मिट्टी व कोकोपिट्स एवं बिना पेस्टीसाइड्स से आधुनिक खेती का स्टार्टअप शुरू किया है।

सात माह पहले कोटा शहर के निकट नांता में एक एकड़ जमीन पर पानी के पाइप आदि का स्ट्रेक्चर खड़ा कर बिना मिट्टी के उपयोग के सब्जियों उगाने की खेती शुरू की। अब प्रतिदिन 900 किलो टमाटर आदि सहित अन्य सब्जियों की पैदावार प्रतिदिन ले रहे हैं। स्टार्टअप में सफलता मिली तो तीनों ने कोटा के निकट केशोरायपाटन में 65 बीघा जमीन पर आधुनिक कृषि का बड़ा केन्द्र खोलने की तैयारी शुरू कर दी है। तीनों आईआईटीयन का प्रयास है कि स्टार्टअप को 65 बीघा जमीन पर विस्तार देकर 6 माह में सब्जियों का उत्पादन शुरू होगा और जिससे यह राज्य का सबसे बड़ा स्टार्टअप बन सके।

स्टार्टअप की ऐसी हुई शुरूआत
तीनों ने नौकरी के बजाय मिलकर खेती में स्टार्टअप शुरू करने की सोची। सबसे पहले अभय व अमित ने मिलकर घर की छत पर ग्रोइंग चैम्बर्स में पालक, भिंडी, टमाटर, लौकी सहित अन्य सब्जियां उगाई और इन सब्जियों को बाजार में बेचा। इसमें सफलता मिली तो तीनों ने मिलकर नांता में करीब एक एकड़ जमीन पर 7-8 माह पहले पॉलीहाउस तैयार कर ग्रोइंग चैम्बर्स लगाकर टमाटर की खेती से स्टार्टअप शुरू कर दिया।

80 प्रतिशत कम पानी की खपत, हर मौसम में पैदावार
नांता कृषि फार्म पर ग्रोइंग चैम्बर्स बनाकर केमिकल या पेस्टिसाइड अवशेष मुक्त पानी में सब्जियों की पैदावार ले रहे हैं। इस तकनीक से सौर ऊर्जा व मिनरल वाटर का उपयोग कर पानी व बिजली की खपत को कम किया है। पारम्परिक खेती की तुलना में 80 फीसदी कम पानी की खपत हो रही है। फार्म हाउस का तापमान नियंत्रित रखा जाता है पौधों को ग्रोइंग चैम्बर्स से ही ऑक्सीजन, न्यूट्रिशियन की पूर्ति होती रहती है। सर्दी, गर्मी, बारिश तीनों मौसम में सब्जियां पैदा की जा सकती है।

दिल्ली-मुम्बई जा रहा टमाटर
फार्म हाउस पर टमाटर की 5-6 किस्मों से अभी रोजना करीब 800 से 900 किलो टमाटर का उत्पादन हो रहा है। जिसे कोटा सहित दिल्ली, मुम्बई सहित अन्य शहरों में भेजा जा रहा है।

ऑफिस में बैठकर पौधों की देखभाल
एक ऑटोमेटिक कन्ट्रोल सिस्टम तैयार किया है जो मोबाइल से कनेक्ट रहता है। इस सिस्टम से ऑफिस में बैठे बैठे भी पौधों की देखभाल कर सकते हैं। मोबाइल से ही बटन दबाकर ऑफिस में बैठकर फार्म हाउस में पौधों में पानी व जरूरी मिनरल्स पहुंचाया जा सकता है। इन्होंने ग्रोइंग चैम्बर्स व ऑटोमेटिक कन्ट्रोल सिस्टम का पेटेंट भी करवाया है।

अब बड़ी खेती की तैयारी
नांता स्थित फार्म हाउस में पिछले 7-8 माह से ग्रोइंग चैम्बर्स के माध्यम से सब्जियां उगाने की ट्राइल सफल होने के बाद अब देश का सबसे बड़ा स्टार्टअप केशवरायपाटन में करीब 65 बीघा में शुरू किया जाएगा। जहां हजारों महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा और बड़े स्तर पर उत्पादन होने पर सब्जियों का निर्यात भी किया जा सकेगा।