
कोटा . तीन साल बाद नव संवत्सर 2077 में एक माह अधिमास का भी होगा। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। संवत्सर के अनुसार इसमें 12 की बजाए 13 महीने होंगे। यह संयोग हर तीन साल में एक बार बनता है। ज्योतिषाचार्य अमित जैन बताया कि विक्रम संवत्सर 2077 की शुरुआत 25 मार्च से होगी। जो प्रमादी नाम का रहेगा। इस के राजा बुध ओर मंत्री चंद्र रहेंगे।
इसमें आश्विन दो महीने होंगे। आश्विन माह 3 सितंबर से 31 अक्टूबर तक रहेगा। यानी इसकी अवधि करीब दो माह रहेगी। इन दो माह में बीच की अवधि वाला एक माह का समय अधिमास रहेगा। इसके बाद जितने भी त्योहार आएंगे वे 10 से 15 दिन या इससे कुछ अधिक विलंब से आएंगे। दीपावली इस बार 14 नवंबर को होगी।ओर देवउठनी एकादशी25 नवंबर को आएगी।
क्या ओर कब होता है अधिकमास
सौरमास 365 दिन का, जबकि चंद्रमास 354 दिन का होता है। इससे हर साल 11 दिन का अंतर आता है, जो तीन साल में बढ़कर एक माह से कुछ अधिक हो जाता है। यह 32 माह 16 दिन के अंतराल से हर तीसरे साल में होता है। 2018 में भाद्रपद में था तो अब आश्विन में हो रहा है। इस अंतर को पाटने के लिए अधिमास की व्यवस्था की गई है। सूर्य की बारह संक्रांति के आधार पर ही वर्ष में 12 माह होते हैं। प्रत्येक तीन वर्ष के बाद पुरुषोत्तम माह आता है।
18 सितंबर को अधिमास के रूप में प्रथम आश्विन की शुरुआत होगी
संवत्सर 2077 में अधिमास की दो तिथियां कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तथा शुक्ल पक्ष की तृतीया का क्षय 18 अक्टूबर को है। इस कारण 17 सितंबर को श्राद्ध पक्ष के एक माह बाद 17 अक्टूबर को शारदीय नवरात्र आरंभ होगा। श्राद्धपक्ष की सर्व पितृ अमावस्या के अगले दिन नवरात्र शुरू हो जाते हैं, लेकिन अमावस्या व नवरात्र के बीच पूरे एक माह का अंतर होगा।
पंडितों के अनुसार पंचांग गणना के अनुसार 3 सितंबर कृष्ण पक्ष एकम से आश्विन माह शुरू होगा, जो 31 अक्टूबर तक रहेगा। इस अवधि में 18 सितंबर को अधिमास के रूप में प्रथम आश्विन की शुरुआत होगी। अधिमास को पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। इस मास को शुद्ध मास की गणना में नहीं गिना जाता है। इसलिए अधिमास की संज्ञा दी गई है।
19 साल बाद दो आश्विन
ज्योतिषाचार्य अमित जैन का कहना है कि दो आश्विन मास वाला अधिकमास का योग 19 साल बाद आ रहा है। इसके पूर्व वर्ष 2001 में आश्विन में अधिकमास का योग बना था। इस वर्ष 2020 में आश्विन मास अधिकमास होगा, इसलिए दो आश्विन रहेंगे। अधिकमास 18 सितंबर से शुरू होकर 16 अक्तूबर तक चलेगा। इसके कारण व्रत-पर्वों में 15 दिन का अंतर आ रहा है। यानी जनवरी से अगस्त तक आने वाले त्योहार करीब 10 दिन पहले और सितंबर से दिसंबर तक होने वाले त्योहार 10 से 15 दिन की देरी से आएंगे।
इसलिए कहते है पुरुषोत्तम मास
इस अधिमास का कोई स्वामी न होने से देवताओं ने इसे अशुद्ध माना और इसमें कोई भी मांगलिक कार्य कैसे करें, इस संशय में पड़ गए। तब वे भगवान विष्णु के पास गए तो उन्होंने कहा कि आज से मैं इस अधिमास को अपना नाम देता हूं।जब से पुरुषोत्तम मास के दौरान जप, तप, दान से पुण्य प्राप्ति होते हैं। श्रीमद्भगवतगीता, श्रीराम कथा वाचन व विष्णु की उपासना की जाती है। कथा पढ़ने-सुनने से भी लाभ होता है। इस मास में जमीन पर शयन, एक ही समय भोजन करने से अनंत फल प्राप्त होते हैं।
Published on:
12 Mar 2020 07:08 pm
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