
शरीर में विटामिन की कमी, दे रहा थकान-आलस-दर्द
कोटा. दिनभर एयर कंडीशनर कमरे, धूप की कमी या इसकी अनुपलब्धता वाले घर या दफ्तर में रहने सहित पौष्टिक खान-पान की कमी से बच्चों और युवाओं में विटामिन डी और विटामिन बी 12 की कमी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। चिकित्सकों के पास पहुंचने वाले मरीजों में करीब 25 फीसदी मामलों में इनकी कमी पाई जा रही है। विटामिन की कमी नर्वस सिस्टम, हड्डियों, आंख और इम्यून सिस्टम को प्रभावित करती है। एक प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, विटामिन डी की कमी 80 से 90 प्रतिशत मामलों में पाई जाती है।
विटामिन बी 12: आंखों में समस्या, याददाश्त कमजोर होने, सांस में तकलीफ, हाथ-पैरों में झनझनाहट, थकान की समस्या होती है। इसके कारण रक्त की तीनों कणिकाओं व प्लेटलेट्स की कमी भी हो जाती है। जिसे पेनसाइटोपीनिया कहते है। जिसे लोग ब्लड कैंसर भी समझ बैठते है। जबकि सामान्य जांचों से इसे संभावना को दूर किया जाता सकता है। ज्यादातर केस बी-12 की कमी ही सामने आती है। एक-दो माह के उपचार के बाद यह सामान्य भी हो जाता है। इसकी कमी अधिकांश शाकाहारी लोगों में होती है। इन्हें दूध, दही और इससे बने उत्पादों का अधिक उपयोग करना चाहिए।
विटामिन डी : बार-बार बीमार पड़ना, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, थकान और सुस्ती, मूड खराब रहना, बालों का झड़ना, अवसाद, मांसपेशियोंमें दर्द इसके मुख्य लक्षण हैं। सुबह के समय गुनगुनी धूप का सेवन और फल, दूध, दही का सेवन किया जाना चाहिए।
केस: गृहणी सीमा 46 वर्षीय कुछ दिनों से पिंडलियों में दर्द , कमर दर्द, कमजोरी, दिनभर थकान रहने से पीड़ित थी। डॉक्टर को दिखाया तो रूटीन जांचों के अलावा विटामिन बी- 12 व विटामिन डी जांच की सलाह दी गई। जांचों में विटामिन डी-12 की कमी पाई गई।
केस: मुकेश 32 वर्षीय हाथों में झनझनी, सुन्नपन, कमजोरी, थकान की शिकायत लेकर चिकित्सक के पास पहुंचा। जांच में विटामिन बी-12 की कमी के साथ खून की कमी पाई गई। चिकित्सक की सलाह पर
विटामिन बी-12 के इंजेक्शन व अन्य दवाइयां लेने के बाद अब कुछ राहत है।
केस: अब्दुल 33 वर्षीय अक्सर शरीर दर्द, आलसपन, कमजोरी के चलते ऑफिस से छुट्टी पर रहने लगा। जोड़ों व हड़ियों में दर्द होने पर चिकित्सक की सलाह से टेस्ट करवाए तो विटामिन डी की जांच 15 से कम आई। उपयुक्त इलाज शुरू करने पर अब सब ठीक है।
विटामिन बी 12 व डी की कमी से हड्डियों व मांसपेशियों में दर्द होता है। इसके कारण रक्त की तीनों कणिकाओं व प्लेटलेट्स की कमी भी हो जाती है। जिसे पेनसाइटोपीनिया कहते है। जिसे लोग ब्लड कैंसर भी समझ बैठते है। जबकि सामान्य जांचों से इसे संभावना को दूर किया जाता सकता है।
- डॉ. पंकज जैन, एसोसिएट प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, कोटा मेडिकल कॉलेज
Published on:
09 Oct 2023 12:57 pm
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