कोटा. चम्बल नदी के सबसे बड़े बांध गांधी सागर से सोमवार शाम को राहत बड़ी खबर आई है। इस बांध से शाम को जल प्रवाह घटाकर 5.50 लाख क्यूसेक कर दिया है। इसके बाद कोटा बैराज से भी जल प्रवाह घटाकर 6.66 लाख क्यूसेक कर दिया है। हालांकि सुबह बैराज से अब तक सर्वाधिक 7.25 लाख क्यूसेक पानी की निकासी की गई थी।
इससे डाउन स्ट्रीम के ऊपरी क्षेत्र में भी पानी बढऩे लगा तो प्रशासन के हाथ पैर फूल गए और समूचे क्षेत्र में सेना, एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, आरएएस की बटालिन को भेज दिया गया और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की मुनादी करवा दी। बैराज के समांतर पुल पर सेना को तैनात कर दिया गया है। उधर चम्बल नदी का पानी चन्द्रलोई नदी में उलटा आने से आधा दर्जन गांव टापू बन गए हैं। गांवों का कोटा से सम्पर्क कट गया है। गांवड़ी में बाढ़ के पानी में डूबने से एक वृद्ध की मौत हो गई है।
कोटा में पिछले चार दिन से बाढ़ आई हुई है। शहर में करीब पांच हजार मकान पानी में डूबे हुए हैं। सोमवार को भी चम्बल के डाउन स्ट्रीम की बस्तियों में 10 से 15 फीट तक पानी भरा हुआ था। सेना और एसडीआरएफ की टीम दिनभर रेस्क्यू कर लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटी रही। बचाव व राहत कार्य लगातार जारी है। नीचले क्षेत्रों में लोगों को जाने से रोकने के लिए जगह-जगह सेना के जवान तैनात कर दिए हैं।
परवन का पानी उतरने से बारां-झालावाड़ मगाह हाइवे पर 74 घंटे बाद रविवार देर रात से वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई। इटावा के निकट सूखनी नदी की पुलिया पर पानी होने से कोटा-इटावा मार्ग तीसरे दिन भी और खातौली के निकट पार्वती पुल पर चादर चलने से कोटा-श्योपुर मार्ग करीब एकसप्ताह से बंद है।
ताकली नदी में उफान के चलते चेचट-अमझार मार्ग तीन दिन से अवरुद्ध पड़ा है। बाढ़ प्रभावित इटावा क्षेत्र में एसडीआरएफ की तीन टीमें दूसरे दिन भी सक्रिय रही। सुल्तानपुर ब्लाक के एक दर्जन गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। क्षेत्र में करीब तीन हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।