
जहां सालों तक बरसाती पानी बहा, UIT Kota का अब नाला मानने से इनकार
कोटा.
कोचिंग सिटी कोटा के महावीर नगर पारिजात कॉलोनी के बरसाती नाले में योजना काटने के मामले में यूआईटी (UIT) के अफसर बचाव में उतर गए हैं। यूआईटी के अफसरों ने तो सिरे से ही खारिज कर दिया। यूआईटी ने कहा कि जहां योजना काटी जा रही है, वह जमीन नाले की नहीं है। यह बात अलग है कि यहां सालों तक बरसाती पानी बहता रहा है। यूआईटी अफसरों ने अपने बचाव में प्रेसनोट जारी कर न केवल जनता को गुमराह करने का प्रयास किया, बल्कि खुद की परेशानी और अधिक बढ़ा दी है।
यूआईटी की मंशा है कि जैसे-तैसे इस जगह पर योजना लॉन्च कर करोड़ों का राजस्व अर्जित किया जाए, क्योंकि कोचिंग संस्थानों के पास से गुजर रहा यह बरसाती नाला बेशकीमती है। जमीनों के कारोबार से जुड़े लोग भी यही चाहते हैं कि यूआईटी इस जगह पर जल्दी से जल्दी योजना लॉन्च कर बेच दे, ताकि ऐसे लोग यहां भूखण्ड खरीदकर बहुमंजिला हॉस्टल व अन्य कॉम्पलेक्स खड़े कर सकें। आय अर्जित करने की अंधी दौड़ के कारण ही यूआईटी अधिकारियों ने नियम-कायदों को ही भुला दिया है।
प्रेसनोट में दो तरफा बात-
जारी प्रेसनोट में जो लिखा है, उसमें यूआईटी दो बात कह रही है। एक तरफ कह दिया कि वह जगह नाले की अंकित नहीं है। दूसरी तरफ यह भी कहा कि नाले में बरसाती पानी अब ज्यादा नहीं आता। पहले यूआईटी खुद यह क्लियर तो कर ले कि आखिर उनकी ओर से क्या पक्ष रखा जाना चाहिए, जिससे जनता में सही संदेश जाए।
लोग बोले, ग्रीन पाथ-वे बनाया जाए-
लोगों का कहना है कि साफ दिख रहा है कि जो योजना काटी जा रही है वह सालों तक बरसाती पानी बहने वाले नाले में है। यदि यूआईटी को इस जगह को जनहित में ही उपयोग करना है तो यहां ग्रीन पाथ-वे बनाकर कोचिंग के लाखों विद्यार्थियों को सुबह-शाम भ्रमण का तोहफा देना चाहिए। क्षेत्र के पार्षद गोपाल मंडा ने कहा, स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं, इसलिए न्यास को इस योजना को स्थगित कर देना चाहिए। भाजपा शहर जिलाध्यक्ष कृष्ण कुमार सोनी ने कहा कि नाले में योजना विकसित करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
इस नाले में अब पानी नहीं आता : यूआईटी सचिव
न्यास सचिव राजेश जोशी ने प्रेसनोट जारी करके इसे सही ठहराया है। उन्होंने कहा, डायवर्जन चैनल बनने के बाद इस नाले में पानी नहीं आता। न्यास कोटा की ओर से महावीर नगर पारिजात कॉलोनी में न्यास के स्वामित्व की भूमि पर अवैध निर्माण पशु बाड़े जैसे अतिक्रमणों और गंदगी के अम्बार को हटाकर सभी सुविधाओं से सुसज्जित आवासीय योजना विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि राजस्व रेकार्ड के अनुसार यह भूमि बरसाती नाला अंकित नहीं है, फिर भी बरसाती पानी के निकास को ध्यान में रखते हुए नाले के लिए पर्याप्त भूमि छोड़ी जा रही है।
सवाल मांगते जवाब-
Published on:
18 Sept 2021 06:10 pm
बड़ी खबरें
View Allकोटा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
