आखिर क्यों गिरती है आकाशीय बिजली, ऐसी आपदा से कैसे बचें, पढ़ें यह खबर

-आकाशीय बिजली गिरने से 30 मीटर तक का क्षेत्र होता है प्रभावित
-2 हजार एमपीयर होता है पावर व 100 से 1 हजार मिलियन तक होता है वॉल्ट
-एमबीबीएस को भी पढ़ाया जाता है पाठ

By: KR Mundiyar

Updated: 12 Jul 2021, 09:31 PM IST

कोटा.
राजस्थान में आकाशीय बिजली के वज्रपात ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया। संभवत: इससे पहले राज्य में इतना बड़ा वज्रपात आकाशीय बिजली से नहीं हुआ। मानसूनी बरसात के दौरान तेज गर्जना के साथ प्रदेश के 6 जिलों में बिजली के कहर से 22 लोगों की जान चली गई। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आगामी दिनों में भी भारी बरसात के दौरान ऐसी आपदा घटित होने की संभावना से इनकार नहीं कर सकते। ऐसी आपदा जब भी आती है तब हम सभी के जेहन में एक साथ कई सवाल उभर जाते हैं। जैसे- आखिर आकाशीय बिजली क्यों गिरती है? कहां पर गिरने की संभावना अधिक रहती है। ऐसी आपदा से कैसे बचा जा सकता है? इस तरह के तमाम सवालों के जवाब मौसम वैज्ञानिकों के पास हैं।


मेडिकल यानि डॉक्टरी की पढ़ाई में भी आकाशीय बिजली गिरने एवं उससे बचना पढ़ाया जाता है। डॉक्टर्स के सम्पर्क में ही सबसे ज्यादा आमजन आते हैं। डॉक्टर्स सीधे आमजन को आकाशीय बिजली जैसी आपदा से बचाव को लेकर गाइड करते हैं। कोटा मेडिकल कॉलेज के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पी.के. तिवारी ने बताया कि एमबीबीएस पाठ्यक्रम में डॉक्टर्स को बिजली गिरने से आदमी को कैसे बचाया जा सकता है, इस बारे में पढ़ाया जाता है।

ऐसे गिरती है आकाशीय बिजली---
तूफानी बादलों में विद्युत आवेश होता है। इससे इनकी निचली सतह ऋणावेशित और ऊपरी सतह धनावेशित होती है। इससे जमीन पर धनावेश पैदा होता है। बादलों और जमीन के बीच लाखों वॉल्ट का विद्युत प्रभाव उत्पन्न होता है। धन और ऋण एक-दूसरे को चुम्बक की तरह अपनी-अपनी और आकर्षित करते हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में वायु बाधा बनती है। इससे विद्युत आवेश में रुकावटें आती हैं और बादल की ऋणावेशित निचली सतह को छूने की कोशिश करती है। धनावेशित तरंगे पेड़ों, पहाडिय़ों, इमारतों, बुर्ज, मीनारों और राह चलते लोगों पर गिरती हैं।

शरीर पर घाव पेड़ की टहनियों की तरह से दिखते हैं-
बिजली का पावर 2 हजार एमपीयर होता है। 100 से 1 हजार मिलियन वॉल्ट होता है। जहां बिजली गिरती है, उससे 30 मीटर तक क्षेत्र प्रभावित होता है। इससे आदमी को खरोंच, कुचले हुए घाव हो जाते हैं। उसे पीली गिरी बर्न भी करते हैं। शरीर पर घाव पेड़ की टहनियों की तरह से दिखते हैं।

मृत्यु क्यों होती है?
आकाशीय बिजली गिरने से शरीर की सेन्ट्रल नर्वस सिस्टम फेल (लकवा) हो जाता है। हृदय गति रुक जाती है और फेफड़ों में सांस जाना बंद हो जाता है। इलेक्ट्रिक बर्न भी हो जाता है।

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ऐसी आपदा के शिकार होने से कैसे बचें--
- बरसात में पेड़ के नीचे खड़े नहीं होना चाहिए।
- यदि खुली जगह पर आप खड़े हो तो नीचे बैठकर कान बंद कर दोनों पैरों की एडियों को मिलाकर बैठ जाएं।
-गीली दीवार के पास खड़े नहीं हों।
- लैंडलाइन टेलीफोन से उस समय बात नहीं करें, क्योंकि ऐसे टेलीफोन के तारों से धारा प्रभावित होती है। इससे करंट का खतरा रहता है।

-कार में बैठे हो तो उसे साइड में लगाकर उसके इंजन बंद कर कांच बंद कर लें। हाथों को पैरों पर रख लें।
- टावर व ऊंचाई पर खड़े नहीं हों।
- मकान के बीच में सूखी चप्पल लेकर खड़े रहें। जमीन पर लेटे नहीं। यदि लकड़ी की डाइनिंग टेबल है तो उस पर बैठ जाएं।
-इलेक्ट्रिक सामानों का इस्तेमाल नहीं करें।

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